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भाजपा का विलय दाव का खेल, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा पर बढ़ा सियासी दबाव
Doorbeen News Desk: बिहार की राजनीति में इन दिनों राज्यसभा चुनाव की हलचल है। तमाम दल राज्यसभा में अपनी दावेदारी को लेकर जोड़तोड़ में जुटे हैं। इसी हलचल के बीच भाजपा ने अपनी सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के समक्ष विलय का प्रस्ताव रख दिया है। जिसे राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा ने यह दांव ऐसे समय में फेंका है जब, राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन का दिन समाप्त होने के करीब है।

कुशवाहा का कार्यकाल भी समाप्त होने जा रहा है। सियासी सूत्रों के अनुसार भाजपा की ओर से यह संकेत दिए हैं कि यदि रालोमो का भाजपा में विलय होता है तो कुशवाहा को राज्यसभा भेजने में सहयोग किया जा सकता है। यही बिंदु इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूरण
पहलू है। विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा एक तीर से दो निशाने साधने की रणनीति पर काम कर रही है। एक ओर वह राज्यसभा की सीट पर अपने भरोसेमंद सहयोगी को भेजकर सदन में संख्या संतुलन मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर रालोमो के सामाजिक आधार विशेषकर पिछड़े वर्गों को सीधे अपने

संगठन में समाहित करना चाहती है। परंतु, जानकार मानते हैं कि भाजपा राज के लिए राह आसान नहीं होगी। बिन सार्वजनिक रूप से कहा था कि कुशवाहा ने जदयू छोडने के दौरान इल वे गठबंधन कर सकते हैं, लेकिन भाजपा की सदस्यता स्वीकार नहीं करेंगे। उनका यह बयान आज भी राजनीतिक चर्चाओं में उद्धृत किया जाता है। ऐसे में यदि वे विलय के प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं तो विपक्ष इसे उनके पुराने रुख से जोड़कर सवाल उठा सकता है।








