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जीविका दीदियों को हाट बजार में मिलेंगी स्थायी दुकानें, 725 हाट उत्पाबाजार होंगे विकसित
Doorbeen News Desk: विकसित भारत-गारंटी फार रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 से राज्य में कृषि, पशुधन, मत्स्य एवं दूसरे उत्पादों की बिक्री के लिए 725 हाट उत्पाबाजार विकसित किए जाएंगे। इसमें अलग-अलग श्रेणी के 447 हाट एवं 278 बाजार होंगे। ग्रामीण स्तर पर हाट, बाजार विकसित करने की पूरी जिम्मेदारी ग्रामीण विकास विभाग की होगी।

विकसित भारत-जीरामजी योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में हाट-बाजार निर्माण कराया जाएगा। प्रथम चरण में 20 से 49 डिसमिल के 136 हाट, 73 बाजार, द्वितीय में 50-99 डिसमिल के 125 हाट, 96 बाजार एवं तृतीय श्रेणी के एक एकड़ या इससे अधिक क्षेत्रफल वाले 186 हाट और 109 बाजार विकसित किए जाएंगे।
प्रधान सचिव पंकज कुमार ने बताया कि पहली श्रेणी के हाट एवं बाजार में शेड के साथ पांच चबूतरा, शौचालय-पेयजल को सुविधा, जीविका दीदियों के लिए तीन स्थायी दुकान, मल्टी पर्पस स्टोर, गार्बेज डिस्पोजल पिट, द्वितीय श्रेणी के हाट, बाजार में शेड के साथ 13 चबूतरा, शौचालय पेयजल की योजना है।

साथ ही जीविका दीदियों के लिए चार स्थाई दुकान, कार्यालय, मल्टी पर्पस स्टोर, गार्बेज डिस्पोजल पिट और तृतीय श्रेणी में शेड के साथ 16 चबूतरा, शौचालय-पेयजल की सुविधा, जीविका दीदियों के लिए छह स्थाई दुकानें, कार्यालय और दो मल्टीपर्पस स्टोर के साथ गार्बेज डिस्पोजल पिट का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विकसित सभी हाट बाजारों को ई-नाम योजना से जोड़ने का काम कृषि विपणन निदेशालय करेगा।
हाट और बाजार को विकसित किए जाने के बाद स्वामित्व वाले विभाग को जिला स्तरीय पदाधिकारी को हस्तानांतरित किया जाएगा। इसके लिए जिला पदाधिकारी स्तर पर एक समिति गठित की जाएगी। हाट बाजार में निर्मित स्थाई दुकानों और दीदी की रसोई के आवंटन के संबंध में जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी निर्णय लेंगे। ग्रामीण स्तर पर बनाए गए हाट, बाजार की रख-रखाव एवं संचालन की जिम्मेदारी स्वामित्व वाले विभाग की होगी।







