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उदयनाचार्य जयंती को राजकीय पर्व का दर्जा मिलने से करियन समेत क्षेत्र में जश्न का माहौल
Doorbeen News Desk: शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत करियन पंचायत में जन्मे विश्व प्रसिद्ध न्याय दर्शन के महान विद्वान उदयनाचार्य की जयंती को राज्य सरकार द्वारा राजकीय/राज्यस्तरीय पर्व का दर्जा दिए जाने से पूरे क्षेत्र में हर्ष और उत्साह का माहौल है। राज्य सरकार के इस निर्णय को करियन पंचायत सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि और सांस्कृतिक गौरव के रूप में देखा जा रहा है।
लोगों का कहना है कि इससे न केवल क्षेत्र की पहचान को नई ऊंचाई मिलेगी, बल्कि उदयनाचार्य जैसे महान दार्शनिक के योगदान को भी राज्य स्तर पर उचित सम्मान प्राप्त होगा। स्थानीय लोगों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने राज्य सरकार के इस फैसले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय सिन्हा, कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री तथा रोसड़ा विधायक बीरेन्द्र कुमार के प्रति आभार व्यक्त किया है। सभी ने इसे क्षेत्र के प्रति सरकार की सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

रोसड़ा विधायक बीरेन्द्र कुमार ने कहा कि महान दार्शनिक उदयनाचार्य शंकराचार्य के समकालीन रहे हैं और भारतीय न्याय दर्शन में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि उदयनाचार्य की जन्मस्थली करियन पंचायत में परंपरागत रूप से गंगा दशहरा के अवसर पर उनकी जयंती मनाई जाती रही है। अब राज्य सरकार द्वारा इसे राज्यस्तरीय पर्व का दर्जा दिए जाने से यह आयोजन और भी भव्य तथा संगठित रूप में होगा, जिससे पर्यटन, सांस्कृतिक जागरूकता और शैक्षणिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
करियन पंचायत के मुखिया संजीव कुमार पासवान, राहुल चौधरी, गुंजन सिंह, भाजपा पश्चिमी मंडल अध्यक्ष संतोष कुमार बब्ली, ललित कुमार झा, सरोज कुमार, माधव झा, शंभू झा, श्रवण झा, किरण बेदी झा, नवीन कुमार सिंह, नंदकुमार सिंह, मणिशंकर सिन्हा, शिव शंकर सिन्हा सहित अन्य गणमान्य लोगों ने भी सरकार और विधायक को बधाई दी है। सभी ने कहा कि इस निर्णय से करियन पंचायत और शिवाजीनगर प्रखंड को राज्य के सांस्कृतिक मानचित्र पर विशेष पहचान मिलेगी।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि उदयनाचार्य की जयंती को राजकीय पर्व का दर्जा मिलने से नई पीढ़ी को भारतीय दर्शन, न्याय परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक होने का अवसर मिलेगा। साथ ही, क्षेत्र में शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को भी नई दिशा मिलेगी। इसे लेकर पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोग आने वाले वर्षों में भव्य आयोजन की उम्मीद जता रहे हैं।






