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2024 से बंद नैक ग्रेडिंग पोर्टल जल्द खुलेगा, उच्च शिक्षण संस्थान नैक एक्रेडिएटेड और नॉन एक्रेडिएटेड के रूप में जाने जाएंगे
राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को नेशनल असेसमेंट एंड एक्रडिएशन काउंसिल (नैक) से नयी व्यवस्था में मिलेगी मान्यता
दूरबीन न्यूज डेस्क। राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को नेशनल असेसमेंट एंड एक्रडिएशन काउंसिल (नैक) से नयी व्यवस्था में मान्यता मिलनी है। नैक की ओर से पांच स्तर पर संस्थानों को मान्यता दी जाएगी। इसके अंतर्गत उच्च शिक्षण संस्थानों को निरंतर अपना स्तर सुधारने का मौका मिलेगा, जिसकी मान्यता नैक से मिलेगी। टॉप के संस्थान इंस्टीट्यूशन ऑफ ग्लोबल एक्सीलेंस कहलाएंगे। वहीं, अन्य मान्यता प्राप्त संस्थान इंस्टीट्यूशन ऑफ नेशनल एक्सीलेंस कहे जाएंगे।शिक्षा विभाग के पदाधिकारी बताते हैं कि नैक की ओर से आश्वासन दिया गया है कि जल्द ही इसका पोर्टल खोला जाएगा।


पोर्टल खुलने के बाद नैक से मान्यता के लिए संस्थानें अपना आवेदन कर सकेंगी। इसका पोर्टल जुलाई, 2024 से ही बंद है। इस कारण नैक से मान्यता के लिए आवेदन जमा नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. कामेश्वर झा ने बताया कि अब संस्थान ऑनलाइन रूप से आवेदन करेंगे और नैक के मानकों के अनुरूप पूरी जानकारी देंगे। नैक की टीम अब संस्थानों में आकर जांच नहीं करेगी, बल्कि अन्य एजेंसियों से इसका सत्यापन वह कराएगी। इसके बाद अलग स्तर की मान्यता संस्थानों को दी जाएगी। नयी व्यवस्था के तहत उच्च शिक्षण संस्थान नैक एक्रेडिएटेड और नॉन एक्रेडिएटेड के रूप में जाने जाएंगे।


स्टूडेंट क्रेडिट योजना के लिए जरूरी
मालूम हो कि शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्य योजना का लाभ उन्हीं संस्थानों के विद्यार्थियों को मिलेगा, जिन्हें नैक की मान्यता हो। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में इस योजना के तहत बिना नैक मान्यता के संस्थानों को इस शर्त के साथ लाभ दिया गया कि अगले साल वह अनिवार्य रूप से मान्यता प्राप्त करेंगे। वहीं, प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान में भी कई योजनाओं के लिए नैक की मान्यता अनिवार्य की गयी है।


मालूम हो कि पूर्व में नैक की ओर से संस्थानों की ग्रेडिंग की जाती थी, जो तीन साल के लिए होती थी। इसमें ए, बी, सी आदि ग्रेडिंग मिलती थी। अब ग्रेडिंग नहीं की जाएगी, बल्कि मानकों पर खरा उतरने के आधार पर एक से पांच स्तर में संस्थान बंटेंगे।







