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Doorbeen News Desk: आज 5 नवंबर को जनकवि नागार्जुन के स्मृति दिवस पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के प्रांगण में अवस्थित नागार्जुन की प्रतिमा पर पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो उमेश कुमार, हिन्दी के प्राध्यापक सह जसम राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ सुरेन्द्र प्रसाद सुमन, डॉ मंजरी खरे,
राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक डॉ रघुवीर कुमार रंजन के अलावे शोधार्थी एवं जसम के जिला सह सचिव रूपक कुमार, जयप्रकाश कुमार, मलय नीरव, रजनीकांत कुमार, विद्यासागर, सुभद्रा कुमारी,बेबी कुमारी, कंचन रजक, संध्या राय, सुफिया खातून आदि शोधार्थियों ने माल्यार्पण किया।


प्रो उमेश कुमार ने कहा कि बाबा नागार्जुन अपनी बेबाकी के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके व्यंग्यवाण से कोई भी शोषक-शासक नहीं बच पाये। डॉ सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि नागार्जुन जन आंदोलनों के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त जनकवि हैं। भारत में मुकम्मल आजादी के साथ साथ पूरी दुनिया में हर प्रकार के शोषण-उत्पीड़न से मुक्त साम्यवादी व्यवस्था स्थापित करने के कायल थे।
आज यदि बाबा नागार्जुन होते तो निश्चय ही बर्बर फासिस्ट सत्ता से दो-दो हाथ कर रहे होते। डॉ मंजरी खरे ने कहा कि नागार्जुन ने अपने साहित्य में निर्भीकतापूर्वक सामाजिक यथार्थ का चित्रण किया है और हाशिए के समाज को साहित्य के केन्द्र में स्थापित किया है।


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