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Doorbeen News Desk : समस्तीपुर। जिले के स्वयं सहायता समूह भवन, परतापुर में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा प्रायोजित आजीविका और उद्यम विकास कार्यक्रम (एलईडीपी) योजनान्तर्गत अनमोल उपहार सेवा फाउंडेशन द्वारा आयोजित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के आजीविका हेतु 20 दिवसीय जूट के रेशे से हस्तशिल्प : सीखने से लेकर व्यवसाय तक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे बैच के समापन हुआ।
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त सुर्य प्रताप सिंह ने समूह की दीदीयों से रु-ब-रु होते हुए कहा कि भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। क्योंकि भारत से दूसरे देश को भारतीय उत्पाद निर्यात किया जाता था।


जूट से बने कपड़े मिस्र देश को जाता था। उन्होंने महिलाओं को अपने हुनर को पहचानने और उसे व्यवसाय कि ओर ले जाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि अपनी कला को ताकत बनाइये तथा छोटे से हुनर से बड़े व्यवसाय में बदलने की प्रेरणा दी। डीडीसी श्री सिंह ने कहा कि आज प्लास्टिक से बने वस्तुओं का दुष्प्रभाव बढ़ रहा है, वहीं जूट से बने वस्तु पर्यावरण अनुकूल है। उन्होंने जूट के अनगिनत फायदे बताए तथा महिलाओं द्वारा बनाए गए जूट उत्पाद की प्रशंसा की। उन्होंने नाबार्ड एवं औसेफा के इस रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम कि सराहना की।


डीडीएम नाबार्ड अभिनव कृष्ण ने प्रशिक्षण की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि जीविका दीदीयों को आय में वृद्धि होगी तथा सशक्त होंगी। बिहार ग्रामीण बैंक के वरीय प्रबंधक राहुल कुमार व प्रतीक कुमार ने बैंकिंग योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि बैंक आपलोगों को आर्थिक सहायता देने के लिए तैयार है। मौके पर औसेफा के सचिव ललित कुमार, परियोजना निदेशक प्रेरणा कुमारी, अजित कुमार मालाकार सहित तीस प्रशिक्षणार्थी मौजूद थी।

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