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Doorbeen News Desk: शिवाजीनगर प्रखंड अतर्गत बेला चौक मनोकामना दुर्गा मंदिर में मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। इस दौरान मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चारण, शंखध्वनि और माता के जयकारों से गुंजायमान रहा। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई, जो दिनभर जारी रही। मंदिर में 251 कुमारी कन्याओं एवं महिलाओं ने कलश स्थापित कर नवरात्र का अनुष्ठान किया। विद्वान पंडित आचार्य राम सरजू दास एवं मुन्ना कुमार दास ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से कलश पूजन कराया। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने मां स्कंदमाता से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
मनोकामना दुर्गा मंदिर में प्रत्येक वर्ष नवरात्र के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जाता है। इस वर्ष भी 251 कुमारी कन्याओं एवं महिलाओं ने फलाहार व्रत रखकर कलश स्थापना की है। प्रतिदिन सुबह आठ बजे से 11 बजे तक विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कलश पूजन एवं मां दुर्गा की आराधना कराई जा रही है। पूजा अर्चना का यह सिलसिला विजयादशमी तक जारी रहेगा।


नवरात्र के अंतिम दिन विधि विधान से अनुष्ठान की पूर्णाहुति की जाएगी। इसके साथ ही पंचकुंडीय हवन-यज्ञ का आयोजन भी होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं। नवरात्र के पांचवें दिन उनकी पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि, संतान सुख और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां की कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा बुद्धि, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
मां स्कंदमाता की आराधना से परिवार में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है। इसी आस्था के साथ मंदिर पहुंचने वाले भक्त मां के चरणों में शीश नवाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। बेला चौक मनोकामना दुर्गा मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम महाआरती का आयोजन किया जाता है। आरती के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित होकर माता की आराधना करते हैं।


भक्त दीप जलाकर, पुष्प अर्पित कर और माता के जयकारे लगाकर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होने की मान्यता के कारण यहां श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। नवरात्र के दौरान आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी भक्त माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार मनोकामना दुर्गा मंदिर की स्थापना से जुड़ी एक पुरानी धार्मिक मान्यता है। बताया जाता है कि दशकों पूर्व भूमिदाता एवं शिक्षक गंगा प्रसाद मंडल को स्वप्न में माता ने यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू कराने की प्रेरणा दी थी। इसके बाद बेला बाजार के व्यवसायियों और ग्रामीणों ने मिलकर मंदिर में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू की।

समय के साथ पूजा का स्वरूप भव्य होता गया और यह आयोजन क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक गतिविधियों में शामिल हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। नवरात्र के दौरान यहां भक्तिमय वातावरण बना रहता है और ग्रामीण बढ़-चढ़कर धार्मिक आयोजन में भाग लेते हैं।
मौके पर मुख्य पुजारी गणेश मंडल भंडारी, राम भजन मंडल, मुखिया धर्मेंद्र कुमार मंडल, समाजसेवी जयद्रथ मंडल, अरविंद कुमार, जवाहर प्रसाद मंडल, चंद्रदेव राम, लाल बहादुर मंडल, सिया शरण मंडल, विपिन बिहारी प्रसाद, हरि नारायण सिंह, मुख्य कलशव्रती प्रभु नारायण कुमार, गंगा राम मंडल, रामकरण मंडल, रमाकांत मंडल, गंगा प्रसाद मंडल, देवेश कुमार सिंह,


गणेश कुमार, हरिश्चंद्र सिंह, राम शगुन मंडल, राम शंकर सिंह, हरे राम मंडल, रामसेवक मंडल अधिवक्ता, महेंद्र नारायण मंडल, राम सागर मंडल, शंकर कुमार, शिक्षक, बाबू प्रसाद सिंह, कुशेश्वर सिंह, सुभाष सिंह, डॉ. उमेश कुमार सिंह, विजय कुमार और चंद्र नारायण मंडल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।
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