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Doorbeen News Desk: सिंघिया प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय सोनमा में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं और शिक्षकों को विद्यालय तक पहुंचने के लिए आज भी पगडंडी का सहारा लेना पड़ रहा है। वर्ष 1974 में स्थापित इस विद्यालय को संचालित होते करीब पांच दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक विद्यालय तक आने जाने के लिए समुचित रास्ते का निर्माण नहीं हो सका है।
सड़क के अभाव में विद्यालय पहुंचना बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों के लिए रोजाना परेशानी का कारण बना हुआ है। खासकर बारिश के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। प्राथमिक विद्यालय सोनमा में कक्षा एक से पांच तक बच्चों की पढ़ाई होती है। विद्यालय में वर्तमान में पांच शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि कुल 127 छात्र छात्राएं नामांकित हैं। विद्यालय में बड़ी संख्या में बच्चे आसपास के टोले मोहल्लों से पढ़ने के लिए पहुंचते हैं।


लेकिन विद्यालय तक पहुंचने के लिए पक्के रास्ते की सुविधा नहीं होने से उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि इतने लंबे समय से विद्यालय संचालित होने के बावजूद रास्ते की समस्या का समाधान नहीं होना चिंता का विषय है।
प्रभात फेरी निकाल बच्चों ने उठाई रास्ता निर्माण की आवाज
विद्यालय तक आने जाने के लिए पक्के रास्ते की मांग को लेकर बुधवार को छात्र छात्राओं ने ग्रामीणों के सहयोग से सोनमा गांव में प्रभात फेरी निकाली। बच्चों के साथ ग्रामीण भी इस दौरान शामिल हुए। प्रभात फेरी गांव से निकलकर विद्यालय परिसर पहुंची, जहां बच्चों और ग्रामीणों ने विद्यालय तक आने जाने के लिए बेहतर रास्ता उपलब्ध कराने की मांग उठाई। बच्चों का कहना था कि उन्हें रोजाना पगडंडी से होकर विद्यालय आना पड़ता है।


बरसात के समय यह रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाता है, जिससे विद्यालय पहुंचने में काफी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय तक जाने वाली पगडंडी के दोनों ओर खेतों में फसल लगी रहती है। बारिश के मौसम में पगडंडी से होकर गुजरना और भी मुश्किल हो जाता है। रास्ते के दोनों ओर फसल और झाड़ियों के बीच से होकर बच्चों को गुजरना पड़ता है।
ऐसे में सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का भय भी बना रहता है। अभिभावकों को भी बच्चों को विद्यालय भेजने में चिंता रहती है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से विद्यालय तक जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार सामान्य दिनों में किसी तरह पगडंडी से विद्यालय पहुंचना संभव है, लेकिन बरसात में यह रास्ता बच्चों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है।

पानी और कीचड़ के कारण फिसलने का खतरा बना रहता है। छोटे बच्चों को विशेष रूप से कठिनाई होती है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय तक सड़क बनने से न केवल बच्चों को सुविधा मिलेगी, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों को भी विद्यालय आने-जाने में सहूलियत होगी। इधर विद्यालय के कुछ छात्र-छात्राओं ने विद्यालय के बाथरूम को लेकर भी शिकायत की है। छात्रों का आरोप है कि बाथरूम में ताला लगा रहने के कारण उन्हें शौच के लिए विद्यालय परिसर से बाहर पोखरी के किनारे जाना पड़ता है।
इससे बच्चों को परेशानी के साथ साथ सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर भी चिंता बनी रहती है। छात्रों ने विद्यालय में बाथरूम की नियमित सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने भी विद्यालय में बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताई है।

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिलना जरूरी है। विद्यालय तक पक्का रास्ता नहीं होने और बाथरूम के उपयोग को लेकर सामने आई शिकायतों पर संबंधित विभाग के अधिकारियों को गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए। ग्रामीणों ने जल्द पहल कर विद्यालय तक सड़क निर्माण कराने तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
इस संबंध में प्राथमिक विद्यालय सोनमा के प्रधानाध्यापक सरोज कुमार ने बताया कि विद्यालय तक रास्ता निर्माण की समस्या को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी समेत कई संबंधित अधिकारियों को लिखित रूप से जानकारी दी जा चुकी है। विद्यालय की ओर से रास्ता निर्माण की आवश्यकता से अधिकारियों को अवगत कराया गया है।

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