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वारिसनगर विधानसभा : बाप के बदले बेटे से टक्कर ले रहे महागठबंधन के प्रत्याशी
Doorbeen News Desk: बिहार में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे। बिहार के 243 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक वारिसनगर विधानसभा सीट है। यहां पर 6 नवंबर को मतदान और 14 नवंबर 2025 को वोटों की गिनती होगी। वारिसनगर सीट पर एनडीए व महागठबंधन से कड़ा मुकाबला होगा।
2020 के विधानसभा चुनाव में वारिसनगर सीट पर जदयू के कैंडिडेट अशोक कुमार ने 68229 वोट हासिल कर जीत हासिल की थी। उन्होंने भाकपा माले प्रत्याशी फूलबाबू सिंह को हराया जिनके हिस्से 54316 वोट आए। किंतु इस बार जदयू विधायक अशोक कुमार मुन्ना ने अपने पुत्र मांजरिक मृणाल को मैदान में उतारा है। इन्होंने 2010 से लगातार अब तक विधायक बने हैं। पिछले 15 वर्षों से इस क्षेत्र के विधायक रहे हैं, किंतु इस बार अपने बेटे को मैदान में उतारा है।

जिनका मुकाबला फिर से भाकपा माले के फूल बाबू सिंह से होगा। पिता से पराजय हो चुके फूल बाबू सिंह इस चुनाव में उनके बेटे को मात देने में कितना सफल होते हैं यह तो समय ही के गर्भ में है। वर्ष 2015 में भाकपा माले के प्रत्याशी फूल बाबू सिंह जदयु प्रत्याशी अशोक कुमार मुन्ना से चुनाव हारे थे। इस बार वर्ष 2025 में उनका मुकाबला अशोक कुमार मुन्ना के बेटे मांजरिक मृणाल से होगा।

-:राजद के सीट पर जदयू का कब्जा:-
वारिसनगर मुख्य रूप से ही समाजवादी की धरती रही है। हालांकि बाद में राजद ने इस सीट पर कब्जा कर लिया। समाजवादियों के नाम पर 1977 से जनता पार्टी ने पीतांबर पासवान ने कब्जा जमाया। जिसे 1985 में निर्दलीय समाजवादी नेता रामसेवक हजारी से पुनः कब्जा किया। लेकिन लेकिन 1990 में से फिर से पीतांबर पासवान ने सीट पर कब्जा जमा लिया, वर्ष 1996 में पीतांबर पासवान के सांसद चुने जाने पर उपचुनाव में भिखार बैठा ने जीत बरकरार रखा।
2000 में रामसेवक हजारी ने जदयू से फिर कब्जा किया। 2005 से लगातार दो बार राम सेवक हजारी के पुत्र महेश्वर हजारी ने इस सीट पर लोजपा से खाता खोल दिया। फिर सांसद बन जाने पर इस सीट को लोजपा के खाते पर ही विश्वनाथ पासवान जीत हासील कर कब्जा बनाए रखा। वर्ष 2010 में परिसीमन बदल गया। सामान्य हो गया तो तब से अब तक लगातार तीसरी बार इस सीट पर जदयू के विधायक अशोक कुमार मुन्ना का कब्जा रहा।






