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कालजयी रचनाकार थे बाबा नागार्जुन, केएसआर महाविद्यालय में बाबा नागार्जुन जयंती मनी
दूरबीन न्यूज डेस्क। मिथिला ही नहीं सारे देश की महान विभूति, बाबा नागार्जुन कालजयी रचनाकार थे। वक्त बातें केएसआर महाविद्यालय के हिंदी विभाग के तत्वावधान में आयोजित बाबा नागार्जुन जयंती समारोह को सम्बोधित करते प्राचार्य डॉ .विपिन कुमार झा ने सोमवार को कहीं। समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉक्टर झा ने स्पष्ट किया कि वैद्यनाथ मिश्र यात्री उर्फ बाबा नागार्जुन, मूलतः शोषित वंचित एवं सर्वहारा के कवि थे।


लेकिन इनको किसी भी संकीर्ण वाद विशेष के खांचे में ढाला नहीं जा सकता। हिंदी विभाग के पूर्व वरिष्ठ प्राध्यापक एवं पूर्व विभाग अध्यक्ष प्रो. अवधेश कुमार झा ने बताया कि बाबा नागार्जुन आधुनिक काल के कबीर थे। बाबा नागार्जुन जेपी आंदोलन के समय इमरजेंसी के विरुद्ध जो कुछ लिखा, वह उनके साहसी और विराट व्यक्तित्व को चिन्हित करता है। प्रो. झा ने बाबा नागार्जुन की पंक्तियों को उद्धरित करते हुए कहा कहा, कि
जली ठूंठ पर बैठ कर गई कोकिला कूक।
बाल न बांका कर सकी शासन की बंदूक।
इंदु जी, इंदु जी क्या हुआ आपको, सत्ता की मद में भूल गईं बाप को।


विषय प्रवेश कराते हुए प्रो . शेखर प्रसाद चौधरी ने बाबा नागार्जुन को मिथिला विभूति की संज्ञा देते हुए उनके जीवन पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। विभागाध्यक्ष डॉ. उषा कुमारी ने बाबा नागार्जुन की दर्जनों रचनाओं का हवाला देते हुए सच्चा प्रगतिवादी कवि बताया। प्रो. पवन कुमार चौधरी ने बाबा नागार्जुन को मैथिली भाषा का सशक्त कवि बताया। प्रो. मनोज कुमार झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। प्रो. नीलमणी झा, प्रो.रंजन कुमार राय, प्रो. देवेंद्र कुमार झा , प्रो. वाल्मीकि चौधरी , डॉ. मोहम्मद शाहिद, साहित्यकार कुमोद प्रसाद गिरि, डॉ .चंद्रशेखर झा, डॉ .शोभा कांत झा,प्रो. दीपक कुमार चौधरी, कुंदन कुमार, आदि ने समारोह को सम्बोधित किया। मौके पर अधिकांश महाविद्यालय कर्मी तथा छात्र –छात्राएं मौजूद थे।







