संविधान विरोधी वक्फ संशोधन कानून वापस ले मोदी सरकार, समाहरणालय परिसर में धरना देकर राष्ट्रपति के नाम स्मार पत्र जिलाधिकारी को सौंपा

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संविधान विरोधी वक्फ संशोधन कानून वापस ले मोदी सरकार, समाहरणालय परिसर में धरना देकर राष्ट्रपति के नाम स्मार पत्र जिलाधिकारी को सौंपा

दूरबीन न्यूज डेस्क। संविधान विरोधी सांप्रदायिक वक्फ संशोधन कानून को रद्द करने के सवाल पर भाकपा-माले के राज्यव्यापी विरोध दिवस के तहत समाहरणालय परिसर में माले और इंसाफ मंच ने संयुक्त रूप से धरना दिया। धरना की शुरूआत में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पिछले दिनों आतंकी हमला में मारे गए लोगों को एक मिनट का मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान देश के लिए कठिन समय में आतंक, युद्धोन्माद और सांप्रदायिक नफरत के खिलाफ मजबूती से खडे़ होने का संकल्प लिया गया।

धरना में माले जिला सचिव कृष्णमोहन, राज्य कमिटी सदस्य जितेन्द्र यादव, माले नगर सचिव सूरज कुमार सिंह, इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आफताब आलम, इंसाफ मंच के राज्य सहसचिव जफर आजम और फहद जमां, मानवाधिकार कार्यकर्ता जावेद कैसर,ऐक्टू के जिला सचिव मनोज कुमार यादव, रसोईया संघ के जिला सचिव परशुराम पाठक, खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के जिला अध्यक्ष होरिल राय, किसान महासभा के जिला अध्यक्ष विन्देश्वर साह, माले जिला कमिटी सदस्य रामबालक सहनी, विमलेश मिश्र, वीरबहादुर सहनी,

माले कार्यकर्ता राजेश साह, सुनील राम, माले कार्यालय प्रभारी विजय गुप्ता न नगर कमिटी सदस्य राजकिशोर प्रसाद,
नौजवान सभा के जिला अध्यक्ष विवेक कुमार, जिला सचिव मुकेश कुमार पासवान, शफीकुर रहमान, मो.ऐजाज, मो.आरिफ, छात्र संगठन आइसा के राज्य कमिटी सदस्य नीरज कुमार, मो.शाहिद , दलित विकास समिति के नेता इन्द्रदेव मांझी, मनरेगा मजदूर सभा के नेता वीरेन्द्र पासवान,नूर आलम , हरदेव राम, प्रमुख राम, मजदूर नेता सीताराम पासवान, किसान नेता जलेश्वर पटेल, शंभू प्रसाद यादव, महिला कार्यकर्ता राधिका देवी, शांति देवी, बटेश्वरी देवी, सीता देवी, फूलो देवी ,मंजू देवी सहित पार्टी व सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।

इस दौरान धरना-सभा को संबोधित करते हुए माले और इंसाफ मंच के नेताओं ने कहा कि वक़्फ़ संशोधन कानून मुस्लिम समुदाय व उन्हें संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रत्यक्ष हमला है। यह विधेयक धर्मार्थ कानून निर्माण का खुल्लम- खुल्ला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि 2006 की न्यायमूर्ति राजिंदर सच्चर कमेटी की रिपोर्ट ने माना था कि वक़्फ़ सामाजिक धार्मिक संस्थान हैं जो कल्याणकारी गतिविधियों में लगा रहता है। लेकिन पारित संशोधित वक्फ कानून मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक धार्मिक अधिकार पर हमला है। इसमें गैर मुस्लिम सदस्यों को भी वक़्फ़ बोर्डों में शामिल करने का प्रावधान है। यह किसी भी कानून के तहत अप्रत्याशित कदम है, जो जानबूझ कर मुस्लिमों को उनके संस्थानों के नियंत्रण से वंचित करता है।

आगे माले नेताओं ने कहा कि बाबा साहेब अंबेदकर ने अल्पसंख्यक अधिकार को लोकतांत्रिक गणराज्य का केंद्रीय तत्व कहा था। लेकिन इस कानून ने एक बार फिर – राज्य मशीनरी का प्रयोग अल्पसंख्यक अधिकारों को ध्वस्त करने तथा संवैधानिक गारंटियों को समाप्त करते हुए अपने सांप्रदायिक फासीवादी हमले को बढ़ाने के भाजपा के वास्तविक एजेंडे का पर्दाफ़ाश कर दिया है। माले इस कानून के खिलाफ जनता का आह्वान करती है कि इस असंवैधानिक कदम के विरुद्ध उठ खड़े हों और मोदी सरकार को इसे वापस लेने के लिए बाध्य कर दें।

माले नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को एक स्मार पत्र प्रस्तुत कर वक्फ संशोधन कानून को खारिज करने की मांग की है। यह भी मांग की गई है कि अल्पसंख्यकों और आमलोगों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगातार जारी हमलों पर रोक लगाई जाए।

धरना के दौरान माले नेताओं ने पहलगाम में आतंकी हमले में मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए आतंकी घटना के लिए जम्मू कश्मीर और पहलगाम की सुरक्षा व्यवस्था की असफलता को जिम्मेवार ठहराया जिसके लिए सीधे केन्द्र सरकार दोषी है। उन्होंने कहा कि पहलगाम की आतंकवादी घटना के बहाने भाजपा और मोदी सरकार देश में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने और युद्धोन्माद फैलाने में जुट गई है जो खतरनाक है। देश की जनता आतंकवाद, युद्धोन्माद और सांप्रदायिक नफरत के खिलाफ मजबूती से खडी़ है।