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बिहार लोक सेवा आयोग से तीसरे चरण में चयनित शिक्षकों से तीन-तीन प्रखंडों का मांगा विकल्प
दूरबीन न्यूज डेस्क। बिहार लोक सेवा आयोग से तीसरे चरण में चयनित शिक्षकों से तीन-तीन प्रखंडों का विकल्प मांगा गया है। शिक्षा विभाग की ओर से विकसित सॉफ्टवेयर (edu.bpsc.bihar.gov.in) पर पांच से 12 अप्रैल के बीच शिक्षकों को विकल्प देना है।
शिक्षकों को आवंटित जिलों में ही प्रखंडों का विकल्प मांगा गया है। इन शिक्षकों को विद्यालय आवंटन किए जाने के लेकर प्रखंडों का विकल्प मांगा गया है। शिक्षा विभाग ने गुरुवार को शिक्षकों से विकल्प लिये जाने को लेकर सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र भेजा है। विभाग ने जिलों को लिखे पत्र में कहा है कि प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालय के चयनित शिक्षक, जो काउंसिलिंग में सफल हो गए हैं, उन्हें ही तीन प्रखंडों का विकल्प देना है।


विभाग ने यह भी साफ किया है कि पांच से 12 अप्रैल के बीच जो शिक्षक विकल्प नहीं देंगे, उनके विद्यालय का आवंटन विभाग के स्तर पर उपलब्ध रिक्ति को देखते हुए कर दिया जाएगा। मालूम हो कि तीसरे चरण में 63 हजार से अधिक अभ्यर्थी चयनित हुए थे। इसके बाद इनकी काउंसिलिंग हुई। इनमें 51 हजार 389 शिक्षकों को नौ मार्च को औपबंधिक नियुक्ति पत्र दिया गया है।


सरकार उदारता से शिक्षकों का स्थानांतरण करेगी : मंत्री
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि सरकार पूरी उदारता से स्कूली शिक्षकों का स्थानांतरण करेगी। अभी स्थानांतरण के लिए 1.90 लाख शिक्षकों के आवेदन मिले हैं। सबसे पहले असाध्य रोग वाले शिक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। शिक्षकों को स्थानांतरण संबंधी किसी प्रकार की शिकायत हो, तो वे डीएम, प्रमंडलीय आयुक्त या शिक्षा विभाग मुख्यालय को आवेदन दे सकते हैं। गुरुवार को विधान परिषद में भाजपा के नवल किशोर यादव के गैर सरकारी संकल्प पर सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया।
भाजपा के जीवन कुमार के गैर सरकारी संकल्प पर शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि वित्त अनुदानित माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और डिग्री शिक्षण संस्थानों के शेष बकाये अनुदान का भुगतान किस्तों में कर दिया जाएगा।


शिक्षकों के वेतन भुगतान समेत विभिन्न मुद्दों पर शुक्रवार को प्राथमिक से लेकर उच्च निदेशालय के अधिकारियों की बैठक होगी। भाकपा के संजय कुमार सिंह के गैर सरकारी संकल्प पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि पर्यावरण के प्रति बच्चों की जागरूकता के लिए पाठ्यपुस्तक में अध्याय हैं। बच्चों को फोन, इंटरनेट आदि के नुकसान से बचाने के लिए भी उन्हें जागरूक किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि सदस्य के सुझाव पर सरकार ध्यान देगी। इसके पहले संजय कुमार सिंह ने प्रस्ताव किया कि राज्य के सभी निजी और सरकारी विद्यालयों में बच्चों को सभ्यता, संस्कृति, अनुशासन, मोबाइल फोन का सदुपयोग-दुरुपयोग, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाने के लिए प्रति दिन एक घंटे का नैतिक ज्ञान से संबंधित पाठ्यक्रम अनिवार्य रूप से लागू करे।


निर्दलीय सर्वेश कुमार के गैर सरकारी संकल्प पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि साल में दो बार स्कूलों की ग्रेडिंग के लिए मानक पर तय किए जा रहे हैं।
मार्च और नवंबर में स्कूलों का आकलन का आधार स्कूल में बच्चों की उपस्थिति, शैक्षणिक गतिविधि, वार्षिक मूल्यांकन, शिकायत निवारण की स्थिति सहित विभिन्न बिंदुओं पर जांच की जाती है।





