समस्तीपुर। समस्तीपुर में महिला सिपाही के खुदकुशी मामले के बाद पुलिस केंद्र में बड़ा बदलाव किया गया है। एसपी विनय तिवारी ने जहां मेजर का तबादला करते हुए नए मेजर पद पर नए पुलिस अधिकारी की पोस्टिंग कर दी है। वहीं पुलिस केंद्र में कार्यरत चार सिपाही को भी तत्काल प्रभाव से विभिन्न थानों रिजर्व गार्ड के रुप में तबादला कर दिया है। ताकि जांच को गठित एसआइटी की जांच किसी भी तरह प्रभावित नही हो सके। जिसके करण सार्जेंट मेजर सहित कई पुलिस कर्मियों का तबादला करते हुए तत्काल प्रभाव से नए स्थान पर योगदान करने का आदेश दिया गया है। इस मामले में एसपी विनय तिवारी ने जिलादेश भी निकाल दिया है।


एसपी के द्वारा निकाले गए जिलादेश के अनुसार समस्तीपुर पुलिस केंद्र में कार्यरत परिचारी प्रवर पुलिस अवर निरीक्षक नयन कुमार को तबादला करते हुए अभियोजन कोषांग व त्वरित विचारण कोषांग पुलिस कार्यालय का प्रभारी बनाया गया है। वहीं पुलिस केंद्र में कार्यरत उपस्कर शाखा प्रभारी पुलिस अवर निरीक्षक विपुल कुमार को तत्काल प्रभाव से पुलिस केंद्र का परिचारी प्रवर बनाया गया है। इनदोनों पदाधिकारी को तत्काल प्रभाव से नव पदस्थापन कार्यालय में योगदान करने का आदेश दिया गया है। वहीं दूसरी ओर एसपी ने चार सिपाहियों का भी तबादला किया है।


जिलादेश के अनुसार सिपाही 999 सतीश कुमार पांडेय को पुलिस केंद्र दिवा शाखा से रिजर्व गार्ड लरझाघाट थाना भेजा गया है। इसी प्रकार सिपाही 246 मुन्ना राम को पुलिस केंद्र दिवा शाखा से रिजर्व गार्ड मोहनपुर ओपी, सिपाही 550 चंद्रशेखर आनंद को रअनि प्रथम पुलिस केंद्र से रिजर्व गार्ड सिंघिया थाना एवं सिपाही 43 शिवनंदन कुमार को रअनि द्वितीय पुलिस केंद्र से रिजर्व गार्ड हलई ओपी भेजा गया है। इन सभी पुलिस कर्मियों को 24 घंटे के अंदर नवपदस्थापन कार्यालय में योगदान करने का आदेश दिया गया है।


बतादें कि 13 सितंबर की शाम ईआरवी कंट्रोल रुम में महिला सिपाही अर्चना कुमारी ने खुदकुशी कर ली थी। जिसके बाद पुलिस महकता में हड़कंप मचा हुआ है। महिला पुलिस कर्मी के सुसाईड नोट एवं परिजनों के द्वारा नगर थाना को दिए गए आवेदन में मुख्य आरोप मेजर नयन कुमार पर ही लगाया गया है। इस मामले में मुख्यालय डीएसपी पर भी आरोप लगाया गया है। हाईप्रोफाइल मामला होने के बाद इस मामले की पूरी जांच पड़ताल के लिए सात अधिकारियों की एसआईटी का गठन किया है। साथ ही एसपी विनय तिवारी ने इस मामले में एसआईटी को सात दिनों में कांड की जांच करने का निर्देश दिया है।





