कैबिनेट का फैसला : अब दुर्घटना में मृत्यु होने पर प्रवासी मजदूरों के परिजनों को मिलेगा दो लाख रुपये का अनुदान, बिहार के बाहर रह रहे हैं 40 लाख प्रवासी मजदूर

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पटना। दुर्घटना में मृत्यु होने पर प्रवासी मजदूरों के परिजनों को अब दो लाख रुपये अनुदान मिलेगा। अभी तक अनुदान की राशि एक लाख रुपए थी। इस योजना के दायरे में बिहार के बाहर रह रहे 40 लाख प्रवासी मजदूर आएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली। कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने बताया कि प्रवासी मजदूरों की मृत्यु पर दो लाख जबकि दुर्घटना के कारण स्थायी पूर्ण अपंगता पर 75 हजार की जगह एक लाख और स्थायी आंशिक अपंगता की स्थिति में 37500 की जगह 50 हजार मिलेगा।

दरअसल, राज्य सरकार द्वारा बिहार के बाहर असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए बिहार राज्य प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना, 2008 का संचालन किया जा रहा है। कैबिनेट ने औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए 409 करोड़ खर्च करने की योजना को भी मंजूरी दी। वर्ष 2023-24 में 29 परियोजनाओं पर यह राशि खर्च होगी।

इसका कार्यान्वय एजेंसी बियाडा को बनाया गया है। तत्काल 150 करोड़ की निकासी को हरी झंडी मिली। इस योजना से औद्योगिक क्षेत्रों एवं आधारभूत संरचना का विकास होगा। इससे राज्य के औद्योगिक विकास में वृद्धि होगी, उद्यमियों को लाभ पहुंचेगा व बाहर के उद्यमी निवेश करेंगे।

कैबिनेट ने चिप्स, स्नैक्स, नमकीन, कुरकुरे, पोटैटो चिप्स की दो यूनिट की स्थापना पर भी सहमति प्रदान की। इनपर 105 करोड़ का निवेश होगा जबकि 737 लोगों को रोजगार मिलेगा। डॉ. सिद्धार्थ के अनुसार मेसर्स दादीजी स्नैक्स प्रा. लि. पटना को 16800 एनटीपीए क्षमता का चिप्स, स्नैक्स व नमकीन उत्पादन इकाई की स्थापना के लिए 66.99 करोड़ के निजी पूंजी निवेश की मंजूरी दी गयी। यहां 472 कुशल व अकुशल कामगारों का प्रत्यक्ष नियोजन हो सकेगा।

वहीं, एएफपी मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी प्रा. लि. हाजीपुर, वैशाली को 10 हजार एमटीपीए क्षमता के अतिरिक्त 13 हजार एमटीपीए क्षमता के कुरकुरे व पोटैटो चिप्स उत्पादन इकाई की स्थापना को 38.61 करोड़ के निजी पूंजी निवेश पर वित्तीय प्रोत्साहन स्वीकृति दी गयी। इसकी स्थापना होने पर 265 कुशल-अकुशल लोगों का प्रत्यक्ष नियोजन होगा।

जीविका दीदियां शहरों में भी काम करेंगी। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन करेंगी। साथ ही नगर विकास विभाग से एमओयू होगा।

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