दरभंगा। दरभंगा में पूर्व एमएलसी प्रो. विनोद चौधरी का निधन रविवार की सुबह लहेरियासराय के बलभद्रपुर स्थित निजी आवास पर हो गया। वे 68 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही शिक्षा जगत व राजनीतिक महकमे में शोक की लहर छा गई है।

प्रो. चौधरी शिक्षा के अलावा राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय थे। राजनीति इन्हें विरासत में मिली थी। स्व. उमाकांत चौधरी के पुत्र प्रो. विनोद कुमार चौधरी एक समय में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते थे।

प्रो. चौधरी छात्र जीवन से ही सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। छात्रों की विभिन्न समस्याओं के लिए उन्होंने कई आन्दोलनों का नेतृत्व भी किया। शिक्षक बनाने के बाद शिक्षक राजनीति में सक्रिय रहे एवं सभी आन्दोलनों में सक्रिय सहभागिता की।

2008 में ये जदयू नेता के रूप में विधान परिषद सदस्य बने थे। हालांकि, 2020 में प्रो. चौधरी की पुत्री पुष्पम प्रिया ने पुलुरल्स नाम से अलग पार्टी बना ली। 6 अप्रैल 1955 को जन्मे प्रो. चौधरी ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पीजी समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष के साथ ही सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन भी रह चुके थे।

वर्तमान में वे लनामि विवि के सिंडिकेट में राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में शामिल थे। लनामि विवि स्नातकोत्तर शिक्षक संघ के अधिकारी के रूप में शिक्षक आन्दोलनों का नेतृत्व भी किया। मिथिला युवा केन्द्र एवं यंग सोसियोलॉजिस्ट फोरम के वर्षों तक अधिकारी रहे।

प्रो. चौधरी के छोटे भाई बेनीपुर के जदयू विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी ने बताया कि तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

निधन की सूचना मिलते ही उनके बलभद्रपुर स्थित आवास पर लोगों का जमावड़ा शुरू हो गया है। सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर, नगर विधायक संजय सरावगी, लनामि विवि के कुलपति प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व कुलसचिव प्रो. मुश्ताक अहमद सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उनके आवास पर पहुंच उन्हें श्रद्धांजलि दी।






