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समस्तीपुर। समस्तीपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खानपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था दिनों दिन लचर होती जा रही है। समस्तीपुर जिले का यह इकलौता अस्पताल है जहां एमबीबीएस डॉक्टर पिछले कई महीने से नहीं है। जिसके कारण होम्योपैथिक चिकित्सक के द्वारा एलोपैथिक इलाज कर मरीजों के जान से खिलवाड़ किया जाता है।

वहीं दूसरी ओर नियम को दरकिनार करते हुए सिविल सर्जन के द्वारा डेंटिस्ट को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी बना दिया गया। सिविल सर्जन के पत्र जारी होते ही मामला एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है। सिविल सर्जन ने कहा कि वहां एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। जिसके कारण डेंटिस्ट को प्रभार दिया गया है। इसकी जानकारी मुख्यालय को भी भी गई है।

बतादें कि खानपुर की 19 पंचायतों की जनता सीएचसी के इलाज को एकमात्र डेंटिस्ट चिकित्सक हैं। जबकि एपीएचसी मसीना व नत्थुद्वार में कार्यरत आयुष चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति सीएचसी में की गयी है। दोनों होमियोपैथिक चिकित्सक हैं, लेकिन सीएचसी में एलौपैथिक चिकित्सा करते हैं।

खानपुर सीएचसी में एकमात्र एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. मिथिलेश ठाकुर थे। जो दिसंबर में ही मधेपुरा के सीएस बनने के बाद यहां से चले गये। उसके बाद सीएस ने वारिसनगर पीएचसी प्रभारी डॉ. रामचंद्र महतो को अतिरिक्त प्रभार दिया, लेकिन ओपीडी व इमरजेंसी के लिए कोई एमबीबीएस चिकित्सक की व्यवस्था नहीं की। अब वे भी पिछले महीने सेवानिवृत हो गए।


एक तरफ जहां सरकार के उप सचिव शैलेश कुमार द्वारा जारी पत्र के अनुसार प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी का पद बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग का पद होता है। जिसके कारण बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के ही वरीय चिकित्सा पदाधिकारी को रेफरल, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का प्रभारी एवं निकासी व्ययन अधिकारी बनाना है।

जबकि सीएस डॉ. एसके चौधरी ने पीएचसी में कार्यरत दंत चिकित्सक को ही पीएचसी का प्रभारी पदाधिकारी एवं व्ययन पदाधिकारी बनाया है। आईएमए के संयुक्त सचिव डॉ.हेमंत कुमार सिंह ने कहा किसी भी सरकारी अस्पताल में आयुष चिकित्सक को एलोपैथिक दवा लिखने एवं एलोपैथी इलाज करने का अधिकार अभी प्राप्त नहीं हुआ है।






