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समस्तीपुर। समस्तीपुर के पूसा प्रखंड के धोबगामा पंचायत में लोगो को स्वास्थ्यवर्द्धक पेय ‘नीरा’ उपलब्ध करने के उदेश्य से पूसा प्रखंड मैं नीरा बिक्री केंद्र का शुभारंभ किया गया। समस्तीपुर जिले के जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक विक्रांत शंकर सिंह एवं एवं पूसा प्रखंड के कर्मी द्वारा संयुक्त रूप से नीरा बिक्री केंद्र का उद्घाटन किया गया। वहाँ मौजूद स्थानीय लोगों को नीरा के लाभ के विषय में जानकारी दी गई। लोगों ने भी गुणकारी नीरा को खूब पसंद किया। यहाँ जीविका द्वारा प्रोत्साहित एवं समर्थित मल्लिकार गांव के अमृत जीविका नीरा उत्पादक समूह के माध्यम से उपलब्ध नीरा की बिक्री होगी।

अमृत जीविका नीरा उत्पादक समूह से जुड़े सदस्यों ने बताया कि नीरा पेड़ से प्राप्त शुद्ध एवं मीठा रस है। उन्होंने कहा वह प्रत्येक शाम को साफ लबणी में चुना लेप कर ताड़ के पेड़ पर लबणी लगा देते हैं और प्रातः सूर्योदय से पूर्व इसे उतार लेते हैं। इसे ठंडा रखते हुए बिक्री केंद्र तक पहुंचाया जाता है।

प्रखंड परियोजना प्रबंधक साहेब के द्वारा बताया कि नीरा के विषय में आम लोगों को सही जानकारी नहीं है। बहुत से लोग इसे ताड़ी ही समझते है जबकि नीरा ताड़ी नहीं है। ताड़ी अल्कोहलिक होती है जबकि नीरा नॉनअल्कोहलिक पेय है। नीरा पीने से कोई नशा नहीं होता बल्कि शरीर को अच्छा पोषण प्राप्त होता है। कोल्ड स्टोरेज चेन मेंटेन रखने से नीरा का शुद्ध रूप बरकरार रहता है। यह बहुत ही गुणकारी पेय पदार्थ है, जो गर्मी एवं लू से राहत भी देता है। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने के कारण यह मधुमेह रोगियों के लिए भी उपयुक्त पेय है।

सीधे अर्थों में कहे तो इसे पीने के अनेक लाभ है। दक्षिणभारत में तो यह एक लोकप्रिय नेचुरल ड्रिंक है। वहाँ लोग इसे खूब पसंद करते हैं। बिहार में इसे प्रचारित करने की जरूरत है। बहुत से लोग इसे अभी भी ताड़ी ही समझ रहे हैं जबकि ताड़ी नीरा के खमीरीकृत होने से बनता है जो सामान्यतः धूप एवं गर्मी लगने से अल्कोहलिक हो जाता है। नीरा बेहद गुणकारी है।

नीरा उत्पादन में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि यह खमीरीकृत ना हो। इसके लिए कोल्ड स्टोरेज चेन मेन्टेन किया जाता है। समस्तीपुर ही नहीं पुरे बिहार में ताड़ और खजूर के पेड़ों की अच्छी संख्या है। पूर्व में कई समुदाय के लोग इन पेड़ों से ताड़ी उत्पादन कर जीविकोपार्जन करते रहे हैं किन्तु 2016 की शराबबंदी के बाद शराब के साथ ताड़ी उत्पादन एवं बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

इससे अनेकों परिवारों का जीविकोपार्जन प्रभावित हुआ अतः नीरा को प्रोत्साहित कर राज्य सरकार एक तरफ पूर्व में ताड़ी उत्पादन में लगे परिवारों का जीविकोपार्जन बचाने का प्रयास रही है, वही दूसरी ओर लोगों को एक स्वास्थवर्धक पेय उपलब्ध हो सके ऐसा प्रयास कर रही है। यह प्राप्त संसाधन का अच्छा उपयोग भी है।





