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समस्तीपुर/विभूतिपुर। सुत बित्त नारि भवन परिवारा, होहि जाहि जग बारहि-बारा। अस बिचारि जियँ जागहु ताता, मिलइ न जगत सहोदर भ्राता। भातृ प्रेम के संदर्भ में राम चरित मानस की इस पंक्ति को चरितार्थ कर दिया है प्रखंड के सिंघिया-बुजुर्ग दक्षिण पंचायत के शिवनाथपुर वार्ड 5 में दो सहोदर भाइयो ने। आज के परिवेश में जहाँ भाइयों के बीच संपति को लेकर विवाद, मारपीट आदि झंझट आपसी प्रेम को तार-तार कर दिया है। वही इससे अलग हटकर इस कलयुग में भी त्रेतायुग के भाई भरथ के त्याग और प्रेम की यादो की एक झलक यहाँ मिल रही है। यहाँ के दो सहोदर भाइयों के बीच प्रेम और त्याग की कहानी की चर्चा समाज के लिये आज एक अनुकरणीय विषय बन चुका है।
यहाँ जीने से लेकर मरने तक का एक ऐसा अनोखा और अनूठा भातृ प्रेम का मिशाल सामने आया है। यहाँ के निवासी सहोदर भाई जितेंद्र सिंह और सरयुग सिंह का एक मकान में ही एक साथ रहना एक साथ खाना-पीना, सोना- बैठना और अंत मे अर्थी भी एक साथ उठना समाज मे यह भातृ प्रेम चर्चा का विषय बन चुका है। सहोदर दो भाइयों के बीच ऐसा प्रेम कि छोटे भाई सरयुग सिंह (62) के निधन का सदमा बड़े भाई जितेन्द्र सिंह(67) बर्दाश्त नहीं कर सके और कुछ ही घंटों के अंतराल के बाद बड़े भाई ने भी दम तोड़ दिया। जीवन से मरण तक साथ निभाने वाले दोनों भाई की अर्थी एक साथ उठी और दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार एक साथ पवित्र सिमरिया गंगा तट पर की गई।
मुखाग्नि बड़े भाई को भतीजा अरुण ने दिया और छोटे भाई को उनका पुत्र अनिल ने दिया। शिवनाथपुर के ग्रामीण राम प्रमोद प्रसाद सिंह, रामनाथ सिंह, ननकी सिंह आदि बताते है कि दोनों भाइयो के बीच अटूट प्रेम था जो जीने से लेकर मरने तक एक साथ निभ गया। ग्रामीणों ने बताया कि बड़े भाई जितेंद्र सिंह को छोटे भाई के प्रति इतना प्रेम था कि उन्होनें शादी भी नहीं कि और अपने हिस्से की जमीन भी छोटे भाई सरयुग सिंह के पुत्रों को दान स्वरूप दे दी। सरयुग सिंह के दो पुत्र अरुण, अनिल और दो पुत्री संजू एवम नीलम हैं सभी शादी सुदा हैं।
कहते है कि भतीजा- भतीजी के पढ़ाई-लिखाई से शादी सभी मे अपने ही पुत्र-पुत्री के समान लालन-पालन से लेकर देख रेख की। अपने छोटे भाई सरयुग सिंह के प्रति भातृ प्रेम के चलते बड़े भाई जितेन्द्र सिंह का त्याग समाज के लिये एक मिशाल बना है। इस भातृ प्रेम और त्याग की चर्चा क्षेत्र में जारी है। सिंघिया बुजुर्ग दक्षिण के सरपंच रीता सिंह समाजसेवी राम बहादुर सिंह बताते है कि आज के इस बिषम परिस्थिति में भी शिवनाथपुर के सहोदर भाई जितेन्द्र सिंह और सरयुग सिंह में अटूट प्रेम इस समाज के प्रेरणादायक है।







