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Doorbeen News Desk: शिवाजीनगर अंचल कार्यालय में राजस्व कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों पर व्यापक असर पड़ा है। दाखिल खारिज, परिमार्जन, जमीन की मापी और विभिन्न प्रमाण पत्रों से संबंधित कार्य प्रभावित होने के कारण आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
अपने जरूरी कामों के निष्पादन की उम्मीद लेकर अंचल कार्यालय और आरटीपीएस काउंटर पहुंच रहे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। खासकर दूर-दराज के गांवों से आने वाले ग्रामीणों को समय और पैसे खर्च करने के बावजूद काम नहीं होने से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ के आह्वान पर राजस्व कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।


जानकारी के अनुसार छह से 10 अक्टूबर तक कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया था। इसके बाद 12 अक्टूबर से वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों की अनुपस्थिति का असर अब अंचल कार्यालय के साथ-साथ आरटीपीएस कार्यालय की सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल के कारण दाखिल-खारिज और परिमार्जन के तहत जमीन के नामांतरण तथा ऑनलाइन भूमि अभिलेखों में सुधार से संबंधित फाइलों के निष्पादन में बाधा उत्पन्न हो रही है।
वहीं, सरकारी अमीनों और राजस्व कर्मियों की अनुपलब्धता से जमीन की मापी का कार्य भी प्रभावित है। जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आने वाले आवेदकों को भी परेशानी हो रही है। किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण के लिए आवश्यक भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है।


इससे छात्रों, किसानों और अन्य जरूरतमंद लोगों के जरूरी काम अटक गए हैं। हड़ताल पर गए राजस्व कर्मचारी राकेश रौशन मिश्रा, विकेश कुमार, नीतीश कुमार, अभिषेक कुमार, शिवम कुमार और विवेक कुमार मंडल का कहना है कि सरकार के साथ पूर्व में हुए समझौतों पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। इसी के विरोध में कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में ग्रेड पे में संशोधन कर स्नातक स्तरीय पद के अनुरूप न्यूनतम 2800 रुपये ग्रेड पे लागू करना, अंचल कार्यालयों में आवश्यक तकनीकी सुविधाएं और कार्यालय संसाधन उपलब्ध कराना तथा रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति करना शामिल है। इसके अलावा स्थानांतरण और पदस्थापना से संबंधित नीतियों में सुधार सहित कुल 11 सूत्री मांगों को पूरा करने की मांग की जा रही है।


कर्मचारियों का कहना है कि रिक्त पदों पर बहाली नहीं होने से एक-एक राजस्व कर्मचारी पर कई पंचायतों का अतिरिक्त कार्यभार रहता है। इससे नियमित कामकाज में भी कठिनाई होती है। फिलहाल हड़ताल समाप्त होने को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। ऐसे में आम लोगों को जमीन और प्रमाण पत्रों से संबंधित कार्यों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

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