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Doorbeen News Desk: शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में शनिवार को नई पहल की गई। रानीपरती पंचायत में पहली बार ड्रोन के माध्यम से करीब 15 एकड़ में लगी धान की फसल पर कीटनाशक दवा एवं तरल उर्वरक का छिड़काव कराया गया। इससे किसानों को कम समय में खेत के बड़े हिस्से में समान मात्रा में दवा का छिड़काव करने की सुविधा मिली।
बीएओ सतीश कुमार के नेतृत्व में कराए गए इस ड्रोन छिड़काव को देखने के लिए आसपास के किसान भी खेतों पर पहुंचे। किसानों ने आधुनिक तकनीक से होने वाले छिड़काव को सुविधाजनक और समय की बचत वाला बताया। प्रखंड के रानीपरती पंचायत के किसान निर्दोष सिंह, प्रदीप सिंह, मनोरंजन सिंह, प्रदीप कुमार सिंह, अमित कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार सिंह एवं प्रेम सुंदर सिंह के धान के खेतों में ड्रोन से छिड़काव किया गया।


वर्तमान में धान की फसल में गाबा निकलने और बालियां आने का समय चल रहा है। इस अवस्था में फसल को कीट एवं रोगों से बचाने के लिए समय पर कीटनाशक का छिड़काव बेहद जरूरी माना जाता है। खेत में मजदूरों के प्रवेश से पौधों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे में ड्रोन तकनीक से बिना खेत में उतरे दवा का छिड़काव किया जा सकता है।
बीएओ सतीश कुमार ने बताया कि सरकार की योजना के तहत ड्रोन से दवा का छिड़काव कराने वाले किसानों को प्रति एकड़ 200 रुपये का अनुदान दिया जाता है। इसके अलावा उपयोग किए जाने वाले तरल उर्वरक और कीटनाशक दवाओं पर भी नियमानुसार अनुदान का लाभ किसानों को मिलता है। उन्होंने कहा कि ड्रोन से छिड़काव कराने के लिए किसान को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन के बाद जिला स्तर से ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है और निर्धारित खेत में दवा का छिड़काव कराया जाता है।


उन्होंने कहा कि धान के अलावा आम, केला, लीची, आलू सहित अन्य फसलों में भी ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक एवं तरल खाद का छिड़काव कराया जा सकता है। किसानों को इस तकनीक का अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। इससे समय और मजदूरी दोनों की बचत होती है तथा खेत में दवा का छिड़काव करते समय किसानों को होने वाले जोखिम से भी बचाव होता है। बीएओ ने कहा कि शिवाजीनगर प्रखंड में पहली बार ड्रोन के माध्यम से दवा छिड़काव कराया गया है।
उन्होंने किसानों से अपील किया कि अधिक से अधिक किसान ड्रोन के माध्यम से दवा छिड़काव का कार्य कारण ताकि फसल की नुकसान कम होगी और बीमारी से बचा जा सकता है। कृषि समन्वयक बालमुकुंद मिश्रा ने बताया कि पौध संरक्षण विभाग की योजना के तहत किसानों को अनुदान पर ड्रोन से दवा का छिड़काव कराया जा रहा है।


एक एकड़ में ड्रोन से छिड़काव कराने की लागत करीब 410 रुपये आती है, जिसमें किसान को मात्र 200 रुपये देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि धान में वर्तमान समय गाबा एवं बाली निकलने का है। इस समय कीटों से फसल की सुरक्षा के लिए दवा का छिड़काव जरूरी है। ड्रोन से छिड़काव करने पर पौधों को कुचलने से होने वाली क्षति नहीं होती और दवा भी निर्धारित मात्रा में पूरे खेत में समान रूप से पहुंचती है।
किसान निर्दोष सिंह ने कहा कि ड्रोन से दवा का छिड़काव कराने का अनुभव काफी सुविधाजनक रहा। मजदूरों को खेत में उतारने की जरूरत नहीं पड़ी और कम समय में बड़े क्षेत्र में दवा का छिड़काव हो गया। उन्होंने कहा कि धान की फसल में इस समय खेत में अधिक चलने से पौधों और बालियों को नुकसान पहुंच सकता है। ड्रोन से छिड़काव होने पर यह समस्या नहीं होती। उन्होंने अन्य किसानों से भी आधुनिक तकनीक का लाभ उठाने की अपील की।
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