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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर से समस्तीपुर जिले के चार प्रखंडों में बाढ़ का असर अब खेती पर साफ दिखने लगा है। पटोरी, मोहनपुर, मोहिउद्दीननगर और विद्यापतिनगर के 41 पंचायतों में बाढ़ का पानी पहुंचने से खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं। कई इलाकों में खेत पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। इससे किसानों की महीनों की मेहनत और खेती पर किया गया खर्च बर्बाद होने की स्थिति में है।
बाढ़ के कारण सबसे ज्यादा नुकसान धान और मक्का की फसल को होने की संभावना है। इसके अलावा सब्जी, तिलहन और सोयाबीन की खेती भी प्रभावित हुई है। खेतों में लगातार पानी जमा रहने से फसल के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों के सामने अब फसल बचाने के साथ-साथ लागत वापस पाने की भी चुनौती खड़ी हो गई है।
मोहनपुर की सभी 11 पंचायतें प्रभावित, 41 पंचायतों में पहुंचा बाढ़ का पानी
जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. सुमित सौरभ ने बताया कि जिले के चार प्रखंडों में गंगा के बाढ़ का पानी पहुंचा है। मोहनपुर प्रखंड की सभी 11 पंचायतों में बाढ़ का असर है। वहीं मोहिउद्दीननगर की 15, पटोरी की 8 और विद्यापतिनगर की 7 पंचायतें प्रभावित हुई हैं।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार इन चार प्रखंडों में करीब 10,400 हेक्टेयर में लगी खरीफ फसल प्रभावित होने की संभावना है। हालांकि वास्तविक क्षति कितनी हुई है, इसका आकलन अभी किया जा रहा है। पानी उतरने और खेतों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद फसलवार नुकसान का आंकड़ा सामने आएगा।
कृषि विभाग के अनुसार बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई खेतों में धान की फसल पानी में डूब गई है। मक्का और अन्य खरीफ फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। लगातार पानी में रहने से पौधों के गलने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
किसान सलाहकार-कृषि समन्वयक करेंगे सर्वे, मुआवजे के लिए बाद में लिया जाएगा आवेदन
बाढ़ से हुई फसल क्षति का आकलन करने के लिए कृषि विभाग ने मैदानी स्तर पर कर्मचारियों को लगाया है। जिला कृषि पदाधिकारी ने सभी प्रभावित पंचायतों के किसान सलाहकार और कृषि समन्वयक को अपने-अपने क्षेत्र में जाकर फसल क्षति का आकलन करने और रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
डॉ. सुमित सौरभ ने शुक्रवार को स्वयं भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि फिलहाल विभाग प्रभावित पंचायतों और फसलों का सर्वे कर रहा है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद विभागीय निर्देश के अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।


उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षति आकलन पूरा होने के बाद विभाग के निर्देशानुसार मुआवजा/फसल क्षति सहायता के लिए किसानों से आवेदन लिया जाएगा। ऐसे में किसानों को अपने खेत और फसल से संबंधित जानकारी उपलब्ध रखने की सलाह दी गई है।
बाढ़ ने एक ओर जहां खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया है, वहीं दूसरी ओर किसानों की अगली खेती की तैयारी भी प्रभावित होने लगी है। विभाग की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि किन पंचायतों में कितनी फसल और कितने रकबे को वास्तविक नुकसान हुआ है, ताकि सरकार के निर्देश के अनुसार प्रभावित किसानों को सहायता दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

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