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Doorbeen News Desk: महाकवि कालिदास व पावन पर्व लबान को मिथिला पेटिंग का रंग दे पाई शाबासी
बिहार राज्य बाल श्रम आयोग के अध्यक्ष ने किया सम्मान, गर हौसला बुलंद हो तो कामयाबी कदम चूमती है..16 दिन बाद फिर से सम्मानित होकर मधुबनी जिले के बेनीपट्टी अनुमंडल के हरलाखी प्रखंड के जिरौल गांव की कुशल मिथिला पेंटिंग आर्टिस्ट खुशबू कुमारी उर्फ खुशबू चौधरी ने इसे साबित किया है।
इस बार खुशबू ने बिहार राज्य की राजधानी पटना के बिहार ललित कला अकादमी में आयोजित नेशनल आर्ट एग्जीबिशन 2026 में बिहार राज्य बाल श्रम आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार बादल, भवन निर्माण विभाग के अपर सचिव विनय कुमार और कॉलेज ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट पटना के प्राचार्य डॉ.
राखी कुमारी के हाथों सम्मान पाया है।
इससे पहले पिछले माह 17 जुलाई को खुशबू को मुजफ्फरपुर में आयोजित हेरिटेज नेशनल नेवल आर्ट एग्जीबिशन एंड कंटेस्ट में बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी के हाथों भारतीय कला श्री सम्मान मिला था। इस बार पटना में आयोजित पांच दिवसीय एग्जीबिशन में इस युवा व होनहार कलाकार ने भक्ति और पर्व त्योहारों को मधुबनी चित्रकला से संजोया है। महाकवि कालिदास और मिथिला के पावन पर्व लबान पर आकर्षक कलाकृतियां बनाई है, जो एग्जीबिशन में आकर्षण का केंद्र बन गया है।


चित्र में पेड़ की डाली पर बैठकर उसे काटने के कारण हास्य का कारण बनने सहित भगवान शिव और मां भगवती से मिले आशीर्वाद के बाद कालिदास के जीवन में आए परिवर्तन का वर्णन शामिल है। वहीं मिथिलांचल के पावन लोकपर्व लबान का मिथिला पेंटिंग में चित्रण करते यह दिखाया है कि हमारी संस्कृति से जुड़ा यह पर्व नई धान फसल के स्वागत का प्रतीक है। इस मौके पर किसान खेतों से नई फसल लाकर चूड़ा बनाते हैं और उसे भगवान विष्णु, वरुण और अग्निदेव को अर्पित करते हैं। इस तरह की पेंटिंग के जरिए मिथिला की संस्कृति, कृषि और प्रकृति पूजा को जीवंत रखने की सफल कोशिश की है।
मिथिला पेंटिंग में कालिदास और लबान पर बनाई गई खुशबू की कुशल चित्रकारी की सराहना करते बिहार राज्य बाल श्रम आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह की पेंटिंग सिर्फ कला ही नहीं मिथिला की सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत रखने का दस्तावेज है। जिसे देखकर वर्तमान और नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली परंपरा व संस्कृति को जानने का मौका मिलेगा। आद्या आर्ट एंड फिल्म्स के डायरेक्टर शारदा कुमारी, कॉर्डिनेटर संजीव के. हमराज के आयोजन में सोमवार को शुरू हुई राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी सात अगस्त तक चलेगी।न जिसमें देश भर के कलाकारों की चित्रकला, मूर्तिकला की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई है। इसमें खुशबू की कलाकृति ने एक अलग छाप छोड़ी है।
बता दें कि मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए खुशबू तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, समस्तीपुर मंडल के डीआरएम, बेनीपट्टी के एसडीओ सहित अन्य अधिकारियों से भी सम्मानित हो चुकी है। जिरौल गांव निवासी अमोद चौधरी और सुनैना देवी की पुत्री खुशबू रेलवे स्टेशनों, ट्रेन, राम मंदिर उदघाटन में गई इंजन, कार, एलएनएमयू विश्वविद्यालय भवन सहित अन्य संस्थानों को मिथिला पेंटिंग से सुसज्जित करने वाली टीम का अहम हिस्सा रह चुकी है। खुशबू ने बताया कि वर्ष 2023 से अश्क हैंडीक्राफ्ट नाम की संस्था बनाकर अपने और आसपास के गांवों की बच्चियों व महिलाओं को मधुबनी चित्रकला का मुफ्त प्रशिक्षण देकर स्वरोजगारी बना रही हूं। हालांकि, मेरी हुनर को निखारने में केएसबी क्राफ्ट सहित मेरे माता, पिता, दादी और शुभचिंतकों का भरपूर सहयोग रहा है।

मेरे द्वारा मिथिला पेंटिंग से सुसज्जित पाग, दुपट्टा, साड़ी, कुर्ता सहित अन्य वस्त्र परिधान, क्रोकरी सामग्रियां सरकारी कार्यक्रम, निजी आयोजन, दैनिक उपयोग के लिए भी बनाया जाता है। जिसकी डिमांड अपने देश के अलावा विदेशों के लोग भी करते हैं। उन्होंने कहा कि मिथिला पेंटिंग अब ऐसा फील्ड हो गया है जिसे अपनाकर लोग स्वरोजगारी बन सकते हैं।
मिथिला पेंटिंग कलाकारों को प्रशासनिक मदद की है दरकार: खुशबू ने कहा कि जिस तरह से हम मिथिला पेंटिंग आर्टिस्ट दिन-रात मेहनत करते हैं उस मुताबिक सरकार और प्रशासन के स्तर से मदद किया जाय तो इसमें आने वाली पैसे की कमी बाधक नहीं बनेगी। जरूरत है कि प्राथमिकता के तौर पर मिथिला पेंटिंग कलाकारों को सांस्कृतिक आयोजनों और महोत्सव में उनकी कलाकृतियों को बेचने और प्रदर्शित करने का मौका दिया जाय। उनकी कलाकृति को देश और विदेश का बाजार उपलब्ध कराया जाय। कलाकारों का रोजगार बचा रहने के लिए हैंड पेंटिंग को प्राथमिकता दी जाय। मशीन से हो रही प्रिंटिंग पर रोक लगाई जाय। लोगों से भी अनुरोध है कि मशीन प्रिंटिंग वाले मिथिला पेंटिंग वस्त्र उत्पाद नहीं खरीदें।


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