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Doorbeen News Desk: जननायक कर्पूरी ठाकुर सभागार, बारह पत्थर में नगर निगम, समस्तीपुर के सौजन्य से समय इंडिया (ट्रस्ट), नई दिल्ली एवं पुस्तक मेला समिति (रजि.), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय समस्तीपुर पुस्तक मेला को पुस्तक प्रेमियों के अभूतपूर्व उत्साह और लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए एक दिन के लिए और बढ़ा दिया गया है। अब पुस्तक मेले का समापन 5 जुलाई (रविवार) को रात्रि 9 बजे होगा।
शनिवार की संध्या आयोजित भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, सम्मान समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रम पुस्तक मेले का सबसे आकर्षक एवं यादगार आयोजन साबित हुआ। सभागार देर रात तक तालियों की गड़गड़ाहट, कविताओं की गूंज और साहित्य प्रेमियों की वाह-वाह से सराबोर रहा।

अंतरराष्ट्रीय कवयित्री अंकिता सिन्हा ने बांधा समां, तालियों से गूंज उठा सभागार : कवि सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण अंतरराष्ट्रीय कवयित्री अंकिता सिन्हा रहीं। उन्होंने प्रेम, राष्ट्र, प्रकृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी अपनी ओजस्वी एवं संवेदनशील रचनाओं का ऐसा पाठ किया कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। उनकी पंक्तियां—
“निशानी प्रेम की अपनी अयोध्या धाम को देखो,
अलौकिक और अद्भुत इस अटल आयाम को देखो।
कभी जब प्रेम की तुमको ज़रूरत हो,
सिया के जो हिया में है, प्रभु श्रीराम को देखो।”
ने पूरे सभागार को भावविभोर कर दिया।
वहीं वर्तमान व्यवस्था पर तीखा कटाक्ष करते हुए उन्होंने पढ़ा—
*”सिस्टम ही देश का जो वीक हो गया,*
*चंदा चोरों-माफियाओं के लिए ठीक हो गया।**
*मंदिरों के आंगन में दहशत हो गई,*
*इधर परीक्षा से पहले पेपर लीक हो गया।”**
इन पंक्तियों पर उपस्थित श्रोताओं ने देर तक तालियां बजाकर उनका स्वागत किया।
*देशभर के कवियों ने बिखेरा काव्य का रंग*
कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवि डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह ‘त्यागी’, नीतेश कपूर (नवादा), परवीन कुमार चुन्नू, कुमार अमरेश, मोहम्मद जावेद, मुकेश कुमार, ज्योति कुमारी, स्मृति झा, हरिश्नारायण सिंह ‘हरि’, कविश जमाली, मनोज कुमार साहू, मनोज कुमार साह, राम कुमार चौधरी, राम लखन यादव, भुवेश्वर मिश्र, रंजना लता, शिवेंद्र कुमार पाण्डेय, रिंकू शर्मा, अनिरुद्ध ‘दिवाकर’, दीपक कुमार श्रीवास्तव, आफताब, नवल किशोर, प्रकाश मित्रवत, राजेश वर्मा, डॉ. राम सूरत प्रियदर्शी सहित अनेक कवियों ने कविता, गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, व्यंग्य और लोकभाषा की रचनाओं से साहित्यिक वातावरण को जीवंत बना दिया।
*प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मिला सम्मान, पुस्तक प्रेमियों ने खरीदीं पसंदीदा पुस्तकें*

समापन समारोह में चित्रकला, कविता पाठ, कहानी सुनाओ, गायन एवं नृत्य प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र, पुस्तकें एवं आकर्षक पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिताओं में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों और युवाओं की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया।
दूसरी ओर पुस्तक मेले में साहित्य, प्रतियोगी परीक्षाओं, धर्म, इतिहास, बाल साहित्य, व्यक्तित्व विकास और समसामयिक विषयों की पुस्तकों की जमकर खरीदारी हुई। रामचरितमानस, वाल्मीकि रामायण सहित अनेक लोकप्रिय पुस्तकों के प्रति पाठकों का विशेष आकर्षण देखने को मिला।
*समस्तीपुर से होगा ऐतिहासिक पड़ाव का समापन, अब निकलेगी राष्ट्रीय पुस्तक मेला परिक्रमा*
समय इंडिया (ट्रस्ट), नई दिल्ली के प्रबंध न्यासी चंद्र भूषण ने बताया कि 2 अप्रैल 2026 को झारखंड के हजारीबाग से प्रारंभ हुई झारखंड–बिहार पुस्तक मेला परिक्रमा का 14वां एवं अंतिम पड़ाव समस्तीपुर है। लगभग तीन माह तक चली इस ज्ञान यात्रा ने हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों और पुस्तक प्रेमियों को पुस्तकों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
उन्होंने बताया कि समस्तीपुर पुस्तक मेले के बाद 7 अगस्त से मध्य प्रदेश के ग्वालियर में दस दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले के साथ भारत राष्ट्रीय पुस्तक मेला परिक्रमा का शुभारंभ होगा, जिसके अंतर्गत देश के चार राज्यों में कुल नौ राष्ट्रीय पुस्तक मेलों का आयोजन किया जाएगा।
चंद्र भूषण ने समस्तीपुर एवं आसपास के जिलों के नागरिकों से अपील की कि जो लोग अब तक पुस्तक मेले में नहीं पहुंच सके हैं, वे 5 जुलाई को प्रातः 11 बजे से रात्रि 9 बजे के बीच अवश्य आएं, अपनी पसंद की पुस्तकें खरीदें और इस ऐतिहासिक साहित्यिक आयोजन के अंतिम दिन के साक्षी बनें। ज्ञान, साहित्य और संस्कृति के इस महोत्सव का अंतिम दिन पुस्तक प्रेमियों के लिए यादगार बनने जा रहा है।


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