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Doorbeen News Desk: पूसा (समस्तीपुर)। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा एवं इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन (INSEE) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भागीदारी, तकनीकी नवाचार और सहभागी प्रसार मॉडल पर व्यापक चर्चा हुई। सम्मेलन में देशभर से आए कृषि वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने 100 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए।
सम्मेलन का विषय “कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका को पुनर्परिभाषित करना : सतत कृषि विकास के लिए विस्तार रणनीतियाँ” रखा गया है। दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्र-2 में लिंग संवेदी कृषि प्रसार एवं सलाहकार सेवाओं पर चर्चा हुई। सत्र की अध्यक्षता डॉ. सतीश कुमार सिंह एवं सह-अध्यक्षता डॉ. राजीव बलीराम काले ने की। इस दौरान 40 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।


डॉ. अधिकराव धनाजी जाधव ने रेशम की खेती के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का सहभागी मॉडल प्रस्तुत किया। सुश्री विनीता कश्यप ने कृषि में महिलाओं का श्रम कम करने वाली तकनीकों पर विचार रखे, जबकि सुश्री वर्षा कुमारी ने मक्का प्लांटर एवं टमाटर की निराई पद्धतियों के एर्गोनॉमिक मूल्यांकन पर शोध साझा किया। श्री कपिल कुमार ने डिजिटल ग्रीन के सहभागी वीडियो मॉडल को समावेशी कृषि प्रसार का प्रभावी माध्यम बताया।
तकनीकी सत्र-3 में महिलाएं, नवाचार और तकनीक विषय पर चर्चा हुई। इसकी अध्यक्षता डॉ. वी.वी. सदामते तथा सह-अध्यक्षता कैप्टन डॉ. एल.बी. कलंत्री ने की। सुश्री राधा ठाकुर ने महिलाओं की भूमिका को मुख्यधारा से जोड़ने पर अपने विचार रखे, जबकि डॉ. एस.एस. डोली ने महिला सशक्तिकरण में स्टार्टअप की भूमिका पर केस स्टडी प्रस्तुत की। डॉ. आर.बी. भरसावड़कर ने सिंचाई में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डॉ. अमित कुमार ने आईओटी आधारित मिट्टी की नमी निगरानी तकनीक पर अपने शोध प्रस्तुत किए।


आयोजन सचिव एवं स्कूल ऑफ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के निदेशक डॉ. राम दत्त ने कहा कि सम्मेलन केवल शोधपत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के लिए व्यावहारिक समाधान तैयार करने का मंच है। उन्होंने प्रत्येक कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में महिला किसान सहायता डेस्क स्थापित करने तथा प्रसार कार्यकर्ताओं को जेंडर-संवेदी प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय के नेतृत्व में विश्वविद्यालय महिला उद्यमिता को स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, बाजार से जोड़ने और डिजिटल तकनीकों के विस्तार की दिशा में कार्य कर रहा है।


सम्मेलन में 48 शोध पोस्टरों की प्रदर्शनी भी लगाई गई तथा शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। रविवार को नीति-निर्माताओं के साथ गोलमेज चर्चा के बाद सम्मेलन का समापन होगा। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन से प्राप्त सुझाव कृषि मंत्रालय को भेजे जाएंगे, ताकि महिला केंद्रित कृषि प्रसार नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

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