प्रतिबंध के बावजूद मंदिर परिसर में बजते रहे अश्लील भोजपुरी गाने, विरोध करने वाले युवक की पीट-पीटकर हत्या; प्रशासनिक सख्ती पर उठे सवाल

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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर। बिहार सरकार द्वारा डीजे पर अश्लील और द्विअर्थी भोजपुरी गीतों के प्रसारण पर रोक लगाए जाने के बावजूद समस्तीपुर जिले में खुलेआम ऐसे गाने बजाए जा रहे हैं। इसी लापरवाही का एक दर्दनाक परिणाम हलई थाना क्षेत्र में सामने आया, जहां मंदिर परिसर में अश्लील गीत बजाने का विरोध करने पर 22 वर्षीय युवक की कथित तौर पर पीट-पीटकर और गला दबाकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है।

मृतक की पहचान हलई थाना क्षेत्र के वार्ड-9 निवासी विजय कुमार (22) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार विजय राजस्थान में काम करता था और करीब एक माह पहले ही गांव लौटा था।

बताया गया कि गुरुवार रात गांव में एक शादी समारोह के दौरान डीजे के साथ बारात पक्ष के लोग ब्रह्म काली मंदिर में पूजा के लिए पहुंचे थे। आरोप है कि मंदिर परिसर के पास अश्लील भोजपुरी गीत बजाए जा रहे थे और लोग नृत्य कर रहे थे। विजय ने धार्मिक स्थल के सम्मान का हवाला देते हुए अश्लील गीतों की जगह भक्ति गीत बजाने का आग्रह किया। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।

परिजनों का आरोप है कि विवाद के दौरान विजय के साथ मारपीट की गई और बाद में उसका गला दबाकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद आरोपी पक्ष शादी समारोह में शामिल रहा, जबकि गांव में तनाव फैल गया।

पटोरी के डीएसपी बी.के. मेधावी ने बताया कि अभी तक पीड़ित परिवार की ओर से लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। पुलिस टीम दो बार परिजनों से मिलने गई, लेकिन अंतिम संस्कार में व्यस्त होने के कारण बयान दर्ज नहीं हो सका। आवेदन मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना ने प्रशासनिक निगरानी और डीजे पर प्रतिबंध के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार ने सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील और द्विअर्थी भोजपुरी गीतों के प्रसारण पर रोक लगाने तथा उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद जिले में धड़ल्ले से ऐसे गीत बजाए जा रहे हैं। यदि प्रतिबंध का प्रभावी अनुपालन कराया जाता और समय रहते कार्रवाई होती, तो संभव है कि यह विवाद इतना गंभीर रूप नहीं लेता। अब पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ डीजे संचालन और प्रतिबंधित गीतों के खिलाफ प्रशासन की सक्रियता भी सवालों के घेरे में है।

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