मानसून कमजोर, अभी धान की नर्सरी लगाने में बरतें सावधानी; 28-29 जून को अच्छी बारिश के आसार

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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर। उत्तर बिहार में मानसून की रफ्तार अभी कमजोर बनी हुई है। ऐसे में किसानों को धान की नर्सरी और खरीफ फसलों की बुआई को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी कृषि मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 24 से 28 जून तक अधिकांश क्षेत्रों में मौसम सामान्यतः शुष्क रहेगा, हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। वहीं 28-29 जून के आसपास समस्तीपुर, बेगूसराय, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण जिलों में मेघगर्जन और वज्रपात के साथ अच्छी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस अवधि में अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि कुछ जिलों में यह 40 डिग्री तक पहुंच सकता है। न्यूनतम तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। पूर्वी दिशा से 12 से 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है।

धान की नर्सरी लगाने में जल्दबाजी न करें

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि ऊंची भूमि में अभी धान की बीजस्थली तैयार नहीं करें। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे निचली भूमि में मध्यम अवधि वाली धान किस्मों की नर्सरी तैयार कर सकते हैं। नर्सरी में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए आवश्यकता अनुसार जीवनरक्षक सिंचाई करने की सलाह दी गई है।

वैकल्पिक फसलों पर दें ध्यान

मानसून की कमजोर स्थिति को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने ऊंची जमीन वाले किसानों को धान के बजाय अरहर और उड़द जैसी दलहनी फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी है। इससे कम वर्षा की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना रहेगी।

मक्का और सब्जी की खेती के लिए अनुकूल समय

कृषि विभाग ने किसानों से खरीफ मक्का की बुआई शीघ्र पूरी करने का आग्रह किया है। अंतिम जुताई के समय गोबर की सड़ी खाद एवं संतुलित उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी गई है। वहीं सिंचाई सुविधा वाले किसान भिंडी, लौकी, नेनुआ, खीरा और कद्दू जैसी सब्जियों की खेती भी शुरू कर सकते हैं।

प्याज, गन्ना और लीची उत्पादकों के लिए भी सलाह

किसानों को खरीफ प्याज की नर्सरी तैयार करने तथा उन्नत किस्मों के बीज की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। गन्ना उत्पादकों को शरदकालीन गन्ने में नत्रजन की शेष मात्रा देने तथा वसंतकालीन गन्ने में निराई-गुड़ाई करने को कहा गया है। लीची उत्पादकों को फल तुड़ाई के बाद बागानों में छंटाई एवं साफ-सफाई करने की सलाह दी गई है।

पशुपालकों के लिए विशेष चेतावनी

कृषि मौसम विशेषज्ञों ने पशुपालकों को आगाह किया है कि मेघगर्जन और वज्रपात के दौरान पशुओं को खुले मैदान में न रखें। साथ ही संक्रामक रोगों से बचाव के लिए पशु चिकित्सकों की सलाह के अनुसार आवश्यक टीकाकरण एवं सुरक्षा उपाय अपनाएं।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले सप्ताह संभावित बारिश खरीफ सीजन की खेती के लिए राहत लेकर आ सकती है, लेकिन तब तक किसानों को उपलब्ध नमी का संरक्षण और सिंचाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

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