मजदूरों की कमी के कारण मशीन पर निर्भर हैं क्षेत्र के किसान, मौसम में परिवर्तन, आंधी पानी की अंदेशा से फसल बर्बाद होने की डर से किसान चिंतित

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समस्तीपुर: जिले में मजदूरों की कमी से रबी फसलों की कटनी को ले किसान पूरी तरह से ह्यर्वेस्टर पर निर्भर हो चुके हैं। जबकि क्षेत्र में अभी पर्याप्त हार्वेस्टर उपलब्ध नहीं है। फलस्वरूप किसानों के खेतो में खड़ी गेहूं व अन्य रबी फसलों की वर्षा एवं तूफानी हवा के कारण दुर्गति हो रही है। किसान अपनी मेहनत पूंजी से तैयार फसल को चाह कर भी घर नहीं ला पा रहे हैं। मजदूरों की कमी के चलते कभी फायदेमंद रहने वाली खेती किसानों के लिए बोझ बनते जा रहा है। जिले में हार्वेस्टर की संख्या 16 है, जबकि रीपर कमांडर की संख्या काफी है। जिला कृषि पदाधिकारी सुमित सौरभ ने बताया कि मौसम विभाग फिर से चेतावनी जारी की है। ताकि किसान अपनी फसल को सुरक्षित कर सके। जो फसल तैयार हो गया हैं, वैसे किसानों से आग्रह है कि मौसम पूर्वानुमान के अनुसार ही शीघ्र कटनी कर लें।

: मौसम विभाग ने 7 अप्रैल को फिर से बारिश के लिए किया है अलर्ट:  मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी एक सप्ताह तक मौसम खराब रहने की चेतावनी जारी हुई है। ऐसे में गेहूं की खड़ी फसल को व्यापक नुकसान होने की संभावना से किसान चिंतित है। आगामी 7 अप्रैल को फिर से बारिश होने की संभावना मौसम विभाग ने जताया हैं जिसकी सूचना से किसान काफी चिंतित हैं।

मजदूरों की कमी झेल रहे जिले के किसानों को रबी फसलों की कटनी दौनी परेशानी भरा होता है। जिस कारण खेतो में पककर बर्बाद हो रहे रबी की फसल खासकर गेंहू की कटनी दौनी कर घर लाने में किसानों को पसीना छूट रहा है। गेहूं कटनी का मुख्य समय मार्च अप्रैल होता है। परंतु मजदूरों की कमी से किसानों को हार्वेस्टर ही एकमात्र विकल्प है। जिसके कई दुष्परिणाम किसानों को झेलना पड़ता है। मौसम बदलने की पूर्वानुमान से किसानों की धड़कने बढ़ने लगती है।

:हार्वेस्टर की बढ़ती मांग, कीमत 18 से 30 लाख तक: रबी फसलों की कटाई के मौसम में हार्वेस्टर किसानों के लिए सबसे उपयोगी कृषि यंत्र बन गया है। खेतों में मजदूरों की कमी और समय पर कटाई की जरूरत को देखते हुए किसान तेजी से हार्वेस्टर पर निर्भर हो रहे हैं। बाजार में साधारण कंबाइन हार्वेस्टर की कीमत लगभग 20 लाख रुपये से शुरू होकर 30 लाख रुपये तक पहुंचती है, जबकि किराये पर इसकी सेवा 2500 से 3,500 रुपये प्रति घंटा या प्रति एकड़ के हिसाब से ली जाती है। हार्वेस्टर की मदद से गेहूं, धान और मक्का जैसी फसलों की कटाई की जाती है। इससे किसानों की लागत घटती है और मौसम खराब होने से फसल नुकसान की संभावना है।

 

: मजदूरों के पलायन से होती है परेशानी: बता दे मजदूरों को काम दिलाने के लिए उपयोगी योजना मनरेगा कागजों पर चल रही है या बड़े पैमाने पर मशीनों के उपयोग से बड़ी संख्या में युवा मजदूर दूसरे प्रदेशो में कमाई के लिए चले जाते हैं। जो आठ नौ माह बाद घर लौटते हैं। जिस कारण किसानों को धान रोपनी में तो मजदूर आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। परंतु धान की कटनी से गेंहू की दौनी तक मजदूरों का अभाव झेलना पड़ता है। फलतः मजदूर अक्टूबर के प्रथम सप्ताह से पलायन करना शुरू हो जाते हैं। हाल के दिनों में कई प्रकार के रीपर मशीन एवं हार्वेस्टर ने किसानों की समस्या थोड़ी कम की है। परंतु जानवरो के चारे के लिए मशीन के अलावे हाथो से फसलो की कटनी आवश्यक होती है।

:लगभग 20 प्रतिशत फसल की ही कटनी हो पाई: किसानों ने बताया कि पिछले मानसून की अंतिम बर्षा के कारण खेतो में अत्यधिक नमी से गेहूं बोआई बिलम्ब से हुई। जिसकी कटनी दौनी किसानों के लिए सिरदर्द बन रहा है। गेहूं की कटनी जोरों पर, मौसम में बदलाव, किसान हुए परेशान हैं। क्षेत्र में रबी फसल, विशेषकर गेहूं और सरसों की कटाई इन दिनों जोरों पर जारी है। किसान तेजी से फसल की कटनी में जुटे हुए हैं, ताकि समय रहते फसल को सुरक्षित किया जा सके। किसानों के अनुसार रामभरोस महतो, रामदयाल महतो, रामनरेश मिश्रा, मृत्युंजय ठाकुर आदि ने बताया कि अभी लगभग 20 प्रतिशत फसल की ही कटनी हो पाई है, जबकि शेष फसल खेतों में खड़ी है। ऐसे में यदि बारिश तेज होती है तो कटनी कार्य प्रभावित होने के साथ-साथ तैयार फसल को भी नुकसान पहुंच सकता है।

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