निरंकारी संत समागम, ब्रह्मज्ञान का जीवन में उतरना, परमात्मा से जुड़े रहने का संकेत है: तोताराम 

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निरंकारी संत समागम, ब्रह्मज्ञान का जीवन में उतरना, परमात्मा से जुड़े रहने का संकेत है: तोताराम 

Doorbeen News Desk: उत्तराखंड से आए केंद्रीय प्रचारक परम आदरणीय महात्मा तोताराम जी ने अपने प्रवचन कहा मे उपस्थित संतो महापुरुषों को संबोधित करते हुए कहा – ब्रहज्ञान का जीवन में उत्तरना , परमात्मा से जुड़े रहने का संकेत है। संतो महापुरुषों के शिक्षाओं को जीवन में आत्मसार कर मानवीयता को एकत्व के साथ जोड़ने की भावना को विश्व बंधुत्व का साधन है।

स्वास-स्वास हमें अपनी वास्तविकता को परमात्मा के साथ जोड़े रखना है ताकि हमारा हर कार्य मानवता के लिए समर्पण वाला हो।मानव जन्म से लेकर मृत्यु तक की यात्रा अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में ही खत्म कर देता है वह स्वार्थी व मतलब परस्ती की ओर अग्रसर रहता है। केवल ब्रह्मज्ञानी महात्मा ही प्रीत,नम्रता, मिलवर्तन, सहोपकारिता, परोपकार व एकत्व से युक्त संसार की कामना करते हैं।

उनके विचार व कार्य सदा ही मानवता को एकत्व यानि परमार्थ से जोड़ने वाले होते हैं जो विश्व बंधुत्व की सेवा का आधार है। यदि यह भाव हर मानव में एक दूसरे के प्रति बन जाए तो कोई भी पहले मैं की भावना से जीवन नहीं जिएगा।सभी में पहले आप वाले गुण आएंगे यानि सम दृष्टि वाले भाव जागृत होगी जो वर्तमान परिवेश में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज मानवता को संत समागम के माध्यम से दे रही है।

उक्त सत्संग कार्यक्रम संत निरंकारी सत्संग भवन जुट मिल रोड,समस्तीपुर में मुखी महात्मा राजेश कुमार जी के देख रेख में संपन्न हुआ।
सत्संग कार्यक्रम में राजकिशोर जी,विनोद कुमार महाराज, संचालक महात्मा राम प्रकाश जी, शिक्षक महात्मा नंदेश्वर जी, राजू जी, चन्देश्वर जी , मिथिलेश जी, यमुना जी सहित समस्त सेवा दल के जवान एवं सैकड़ों की संख्या में साधसंगत उपस्थित थे। अवसर पर विशाल लंगर का भी आयोजन हुआ।

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