भैयादूज: भाई की पूजा कर बहनों ने खिलाई बजरी, हाथों में सिंदूर, पिठार लगाकर पान, मखान, कुम्हर के फूल से सात बार हाथ धोकर किया गया पूजा

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भैयादूज: भाई की पूजा कर बहनों ने खिलाई बजरी, हाथों में सिंदूर, पिठार लगाकर पान, मखान, कुम्हर के फूल से सात बार हाथ धोकर किया गया पूजा

Doorbeen News Desk: मिथिला में मनाए जाने वाली भाई-बहन के प्यार भरा पर्व भैयादूज हर्षोउल्लास के साथ गुरुवार को संपन्न हो गया।मिथिला में इसे भातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।पर्व के शुरुआती में बहने जमीन को पहले पवित्र जल या गाय की गोबर से लिपती है।

फिर चावल के पिठार से रंगोली बनाकर बहने छोटे-बड़े भाई को निमंत्रण देती है।भाई को आसन पर बिठाकर भाइयों को लाल तिलक लगाती है, और उसकी पूजा कर उसके दीर्घायु होने की भगवान से मंगल कामना करती है।बहने भाई को तिलक लगाकर उसकी आरती उतारती है।फिर उसके दोनों हाथों में चावल का बना पिठार लगाकर चंदन लगाती है।

और हाथों में पांच पान का पत्ता, कुंभर का फुल, सुपारी, बजरी, सिक्का या सोना आदि डालकर उसे जल की धार से धीरे-धीरे धोकर तांबा या मिट्टी के बर्तन में गिराती है। इस दौरान बहने “गंगा न्योतलन जमुना के हम न्योतय छी भाई के, जहिना गंगा जी के धार बढ़े, ओहिना हमरा भाई के औरदा बढ़े” आदि मंत्र के साथ उसकी पांच या सात वार पूजा करती है। फिर भाई को बजरी और मिठाई खिलाती है।