नीति आयोग के आकांक्षी प्रखंड को लेकर हसनपुर व खानपुर में मुखिया व पंचायत सचिव के साथ कार्यशाला, जीपीडीपी व जीपीपीएफटी के गठन व नीति आयोग के बिंदुओं पर हुआ चर्चा

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समस्तीपुर। जिले में 27 नवंबर से मिशन परिवार विकास अभियान के तहत पुरुष नसबंदी पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही जिले में नवजात शिशु सप्ताह का भी आयोजन किया जा रहा है। जिसको लेकर जिले के नीति आयोग के आकांक्षी प्रखंड हसनपुर तथा खानपुर के मुखिया व पंचायत सचिव के साथ कार्यशाला का किया गया। खानपुर में बीडीओ की अध्यक्षता में तथा हसनपुर में बीपीआरओ नूतन कुमारी की अध्यक्षता में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के दौरान जीपीडीपी व जीपीपीएफटी के गठन व नीति आयोग के बिंदुओं पर चर्चा के साथ ही जिले में चलाए जा रहे हैं नवजात सप्ताह व वह पुरुष नसबंदी पखवाड़ा को लेकर जनप्रतिनिधियों को जागरूक किया गया।

जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर सरकार द्वारा लगातार अभियान चलाया जाता है। इसके लिए समय-समय पर परिवार नियोजन पखवाड़ा का आयोजन करके महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी पर बल दिया जाता है। जिसमें महिलाओं की सहभागिता पुरुषों से अधिक देखी जाती है। वहीं जनसंख्या स्थिरीकरण में पुरुषों की सहभागिता को लेकर भी सरकार लगातार प्रयासरत है।इसके लिए पुरुषों को आगे आने के लिए लगातार प्रेरित भी किया जाता है। इसी को लेकर आगामी 27 नवंबर से लेकर 16 दिसंबर तक मिशन परिवार विकास अभियान के तहत पुरुष नसबंदी पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। इसका मुख्य मकसद इस पखवाड़े में पुरुष नसबंदी को बढ़ावा दिया जाना  और नसबंदी के प्रति पुरुषों को आगे आने के लिए प्रेरित किया जाना है।

नवजात के जन्म के बाद पहले 28 दिन उसके जीवन व विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होता है। बचपन के किसी अन्य अवधि की तुलना में नवजात के मृत्यु की संभावना इस दौरान अधिक होती है। इसलिये कहा जाता है कि नवजात के जीवन का पहला महीना आजीवन उसके स्वास्थ्य व विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होता है। शिशु मृत्यु दर के मामलों में कमी लाने व छह माह तक शिशुओं के बेहतर देखभाल के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से जिले में नवजात सुरक्षा सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा है। एसआरएस 2020 के अनुसार राज्य का नवजात मृत्यु दर 23 /1000 जीवित जन्म है।

एसडीजी का लक्ष्य 2030 तक नवजात मृत्यु दर 12/1000 जीवित जन्म तथा नेशनल हेल्थ पॉलिसी का लक्ष्य 2025 तक नवजात मृत्यु दर 16/ 1000 जीवित जन्म करना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बिहार सरकार सतत प्रयासरत है। प्री-मैच्योरिटी, प्रीटर्म व संक्रमण व जन्मजात विकृतियां नवजात मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। नवजात के स्वस्थ जीवन में नियमित टीकाकरण, स्वच्छता संबंधी मामलों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। जन्म के एक घंटे बाद नवजात के लिये मां का गाढ़ा पीला दूध का सेवन जरूरी करायें। उचित पोषण के लिये छह माह तक मां के दूध के अलावा किसी अन्य चीज के उपयोग से परहेज करें। बच्चों के वृद्धि व विकास को बढ़ावा देने के लिये उचित पोषण महत्वपूर्ण है।

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