Doorbeen News Desk : समस्तीपुर: शारदीय नवरात्र में समस्तीपुर जिले के विभिन्न देवी मंदिरों और पूजा पंडालों में महिलाओं ने मां दुर्गा की खोइच्छा भरने की रस्म निभाई। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों तक सुबह से ही महिला श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। हाथों में पूजा की थाली और खोइच्छा की सामग्री लेकर पहुंचीं महिलाओं ने मां के दरबार में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं मंगलकामना की।
महाष्टमी पर खोइच्छा भरने को लेकर मंदिरों और पूजा पंडालों में खासा उत्साह देखा गया। महिला श्रद्धालु पान, सुपारी, अरवा चावल, श्रृंगार की सामग्री, प्रसाद, बताशा सहित अन्य पूजन सामग्री लेकर मंदिर पहुंचीं। वहां कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार किया। इसके बाद मां दुर्गा के समक्ष खोइच्छा भरने की रस्म पूरी की।
सुबह से मंदिरों में लगी रही कतार
खोइच्छा भरने की परंपरा को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह रहा। कई मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। पूजा स्थलों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए महिलाओं को कतारबद्ध तरीके से दर्शन और पूजा करने की व्यवस्था की गई। इससे श्रद्धालुओं को अपनी बारी से मां के दरबार तक पहुंचने में सुविधा हुई।
जिला मुख्यालय के मंदिरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के पूजा स्थलों पर भी बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचीं। पूजा सामग्री के साथ आई श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना की।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क
महाष्टमी पर मंदिरों और पूजा पंडालों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क रहा। पुलिस जवानों के साथ पूजा समितियों के वॉलंटियर श्रद्धालुओं की कतार व्यवस्थित करने और भीड़ नियंत्रित रखने में जुटे रहे। महिलाओं को शांतिपूर्ण तरीके से खोइच्छा भराने के लिए आवश्यक व्यवस्था की गई थी।

आस्था और परंपरा से जुड़ी है खोइच्छा की रस्म
धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के दरबार में खोइच्छा भरना महिलाओं की श्रद्धा और मंगलकामना से जुड़ी रस्म है। इस दौरान महिलाएं पूजन सामग्री अर्पित कर माता से परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करती हैं। महाष्टमी पर इस परंपरा के निर्वहन से मंदिरों में भक्तिमय माहौल बना रहा।


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