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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर : शारदीय नवरात्र के छठे दिन शुक्रवार को समस्तीपुर जिले में दुर्गा पूजा का उत्साह चरम पर पहुंच गया। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक विभिन्न पूजा पंडालों ने अपना भव्य स्वरूप ले लिया है। कहीं प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों की झलक दिखाई दे रही है, तो कहीं ऐतिहासिक इमारतों की तर्ज पर आकर्षक पंडाल तैयार किए गए हैं। शनिवार को माता का पट खुलने के साथ ही श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन कर सकेंगे। इसे लेकर पूजा समितियों ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
शहर के बारह पत्थर में साईं बाबा मंदिर के स्वरूप में आकर्षक पूजा पंडाल बनाया गया है। वहीं, मथुरापुर में पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार किया गया है। जितवारपुर में विक्टोरिया हाउस के स्वरूप में निर्मित पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनने को तैयार है। इन पंडालों की भव्य बनावट और आकर्षक सजावट दुर्गोत्सव की रौनक बढ़ा रही है।
मां कात्यायनी की पूजा से भक्तिमय हुआ वातावरण
नवरात्र की षष्ठी तिथि पर शुक्रवार को जिले के विभिन्न दुर्गा मंदिरों एवं पूजा पंडालों में मां दुर्गा के छठे स्वरूप माता कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही श्रद्धालु माता की आराधना में लीन रहे। विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई।
इस दौरान ‘या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः’ के मंत्रों से मंदिर और पूजा पंडाल गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने माता को पुष्प, फल, नैवेद्य और चुनरी अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता कात्यायनी शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक हैं। नवरात्र के छठे दिन उनकी आराधना का विशेष महत्व है। भक्तों का विश्वास है कि माता की उपासना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सफाई पर विशेष ध्यान
माता का पट खुलने के बाद पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए पूजा समितियों ने विशेष तैयारी की है। पंडाल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई पर जोर दिया गया है। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन और दर्शन की व्यवस्था को लेकर भी समितियां सक्रिय हैं।
जिला मुख्यालय के साथ विभिन्न प्रखंडों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी दुर्गा पूजा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पूजा स्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। शनिवार से माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की चहल-पहल और बढ़ने की उम्मीद है।

सप्तमी से बढ़ेगी दुर्गोत्सव की रौनक
षष्ठी की पूजा संपन्न होने के साथ ही अब श्रद्धालुओं को माता के पट खुलने का इंतजार है। सप्तमी से नवमी तक देवी मंदिरों और पूजा पंडालों में विशेष पूजा-अर्चना का दौर चलेगा। भव्य पंडाल, माता की प्रतिमाएं और धार्मिक अनुष्ठान जिले में दुर्गोत्सव के उत्साह को और बढ़ाएंगे।


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