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Doorbeen News Desk: शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि पर शुक्रवार को समस्तीपुर जिले के विभिन्न दुर्गा मंदिरों एवं पूजा पंडालों से परंपरागत तरीके से बेल निमंत्रण यात्रा निकाली गई। गाजे-बाजे और माता के जयकारों के बीच निकली यात्रा में यजमान, पंडित और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
जिला मुख्यालय के बारह पत्थर मोहल्ले में आयोजित दुर्गा पूजा को लेकर भी बेल निमंत्रण की रस्म पूरी की गई। पूजा स्थल से पंडितों और यजमानों के नेतृत्व में श्रद्धालु बेल वृक्ष के पास पहुंचे। यात्रा के दौरान श्रद्धालु माता रानी के जयकारे लगाते रहे। बेल वृक्ष के समीप पहुंचने के बाद विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर बेल को निमंत्रण दिया।
सप्तमी की पूजा से पहले बेल निमंत्रण का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुर्गा पूजा में बेल निमंत्रण का विशेष महत्व है। षष्ठी तिथि को बेल वृक्ष की पूजा कर देवी का आह्वान किया जाता है। यह अनुष्ठान सप्तमी की पूजा से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा है।
बेल निमंत्रण के दौरान माता दुर्गा से पूजा स्थल पर पधारने और भक्तों का कल्याण करने की प्रार्थना की जाती है। परंपरा के अनुसार, इसके अगले दिन बेल वृक्ष से निर्धारित विधि द्वारा बेल लाकर नवपत्रिका से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
धार्मिक अनुष्ठानों से बढ़ा दुर्गोत्सव का उत्साह
बेल निमंत्रण के साथ ही जिले में दुर्गा पूजा की रौनक और बढ़ गई है। विभिन्न पूजा समितियों की ओर से सप्तमी की पूजा और माता के दर्शन की तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। मंदिरों और पूजा पंडालों में मंत्रोच्चार तथा माता के जयकारों से भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।



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