दुर्गा पूजा में पुलिस मुस्तैद, पंडालों से गायब रहे दंडाधिकारी!

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Doorbeen News Desk: दुर्गा पूजा के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण माहौल में पर्व संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से संयुक्त आदेश जारी कर विभिन्न पूजा पंडालों में पुलिस पदाधिकारियों और दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी। इसके बावजूद शिवाजीनगर प्रखंड के अधिकांश पूजा पंडालों में दंडाधिकारियों की अनुपस्थिति का मामला सामने आया। एक ओर पुलिस पदाधिकारी और जवान लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते नजर आए, वहीं दूसरी ओर कई पूजा समितियों ने दंडाधिकारियों के एक दिन भी पंडाल में नहीं पहुंचने की शिकायत की। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और संयुक्त प्रतिनियुक्ति के अनुपालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी से लेकर प्रतिमा विसर्जन तक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पदाधिकारियों के साथ दंडाधिकारियों की संयुक्त रूप से ड्यूटी लगाई गई थी।

शिवाजीनगर थाना क्षेत्र में 18 स्थानों पर, जबकि हथौड़ी थाना क्षेत्र में 9 स्थानों पर दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया। सभी पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और पर्व के महत्व को देखते हुए प्रशासनिक सतर्कता आवश्यक थी।

इसके बावजूद प्रखंड के अधिकतर पूजा स्थलों पर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी नजर नहीं आए। दुर्गा पूजा के दौरान शिवाजीनगर थानाध्यक्ष रविंद्र कुमार, अपर थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार, हथौड़ी थानाध्यक्ष मौसम और अपर थानाध्यक्ष मुखराम सिंह सहित अन्य पुलिस पदाधिकारी विभिन्न पूजा पंडालों और संवेदनशील स्थानों का भ्रमण करते रहे। पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों की सक्रियता कई जगहों पर दिखाई दी।

वहीं जब विभिन्न पूजा पंडालों में प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों की उपस्थिति के बारे में जानकारी ली गई तो कई स्थानों पर उनके नहीं पहुंचने की बात सामने आई। प्रखंड स्तर के कुछ पदाधिकारियों की ड्यूटी भी पूजा व्यवस्था में लगाई गई थी, लेकिन उनके भी ड्यूटी स्थल पर नहीं पहुंचने की शिकायत मिली। कई पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि पूरे पूजा आयोजन के दौरान दंडाधिकारी पंडाल में नहीं पहुंचे।

वहीं, एक-दो पूजा समितियों का कहना था कि कुछ पदाधिकारी केवल फोटो खिंचवाने के लिए पहुंचे और फिर वहां से चले गए। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जिला प्रशासन ने विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संयुक्त प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी किया था, तो उसका पालन किस स्तर तक हुआ।

पर्व के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से निपटने, भीड़ को नियंत्रित करने और पूजा समितियों के साथ समन्वय स्थापित करने में दंडाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

ऐसे में उनकी कथित अनुपस्थिति को लेकर जवाबदेही तय करना जरूरी है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों की उपस्थिति की जांच कर कोई कार्रवाई करता है या नहीं।

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